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नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनंद''


अहमद पटेल के निधन से जहां कांग्रेस को एक अहम व खासी क्षति हुई है तो वहीं म प्र. कांग्रेस में उपचुनाव का उत्तर कांड शुरू हो चुका है , नेताओं में जंग छिड़ चुकी है , अस्तित्व और अस्मिता के साथ वर्चस्व की लड़ाई है , जिलाध्यक्ष की हैसियत और ताकत व औकात बताने में जिलाध्यक्ष जुटे हैं , बरसों बरस से अपराजेय और कांग्रेस की जड़ों में दशकों से अपना खून सींच रहे और दिग्विजय सिंह सरकार से लेकर कमलनाथ सरकार तक में मंत्री रहे , डॉ गोविन्द सिंह को भिंड के जिलाध्यक्ष जय श्रीराम बघेल ने कांग्रेस से निकाले जाने की मांग का प्रस्ताव पारित कर दिया है तो वही बाकी जिला कांग्रेस कमेटी भिंड ने जिला उपाध्यक्ष से लेकर कार्यकर्ताओं तक सभी ने जिलाध्यक्ष जय श्रीराम बघेल के बयान का खंडन कर दिया है और कहा है कि मेहगांव में कांग्रेस प्रत्याशी हेमंत कटारे की हार की समीक्षा अवश्य की गयी है और वहां न तो कोई भी प्रस्ताव पारित किया गया और न डॉ गोविंद सिंह की भूमिका पर कोई चर्चा वहां हुई ।
कांग्रेस की सियासी रंगत म प्र. में नजर आने लगी है ।
जय श्रीराम बघेल उस समय के कांग्रेस अध्यक्ष हैं जब ग्वालियर चम्बल में कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्तियां केवल और केवल मात्र सिंधिया जी के चमचों की ही हुआ करतीं थीं । बेशक इसी को यूं कहा जा सकता है कि कांग्रेस में सिंधिया जी की बी टीम सदस्य हैं जय श्री राम बघेल ।
बेशक ही हमें व्यक्तिगत काफी जिल्लत और परेशानी उठानी पड़ी थी कांग्रेस ( कमलनाथ) सरकार के समूचे कार्यकाल में , और शायद हमसे ज्यादा दोयम दर्जे का बर्ताव और व्यवहार इस कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में किसी और से हुआ भी नहीं होगा तथा हमारे पूरे जीवन काल में ऐसे बुरे दिन हमने कभी देखे भी नहीं ।
बेशक हम कमलनाथ सरकार के खिलाफ ही रहे और उन दिनों के अनुभव के चलते रहेंगें भी । मगर सवाल यह है कि अगर हम यह मान भी लें कि उस समय सिंधिया की वजह से हमारे साथ गलत हो रहा था और सिंधिया हावी थे , तो अब क्या बात हुई कि अब जब सिंधिया कांग्रेस में नहीं हैं और फिर भी कांग्रेस के टिकिट गलत बंट गये , बिल्कुल उसी तरह जैसे पहले बंटते थे । अब कौन सिंधिया है कांग्रेस में , अब कौन टिकट बेच गया कांग्रेस के ।
अब कैसे विश्वास किया जाये कि कांग्रेस ठीक और दुरूस्त हो गयी है या हो रही है , जब तवा गरम देख कर अपनी अपनी रोटी सेंकने की कोशिश हो रही है ।
कांग्रेस में ठाकुरों को तो बुरी तरह से ग्वालियर चम्बल में ठिकाने पहले से ही लगा दिया गया है । और अब गोविंद सिंह को भी पटकने की कोशिश की जा रही है जो कि इस समय चम्बल और ग्वालियर में कांग्रेस के एकमात्र प्रभावी ठाकुर नेता , हालांकि डॉ गोविंद सिंह ने कहा है कि कांग्रेस जिलाध्यक्ष जय श्रीराम बघेल बहुत बड़े नेता हैं , वे कुछ भी कर सकते हैं , वे कांग्रेस से निकाल भी सकते हैं । मैं एक छोटा मोटा कांग्रेसी हूं , वे मुझे कुछ भी सजा सुना सकते हैं ।
बचे हैं , तो इसे क्या कांग्रेस के ताबूत में अंतिम कील ठोकना माना जाये वह भी उस सूरत में जबकि सब जानते हैं , ग्वालियर चम्बल राजपूताना बेल्ट है और बगैर राजपूतों के यहां किसी भी राजनैतिक दल की दाल नहीं गल सकती ।
यही एक वजह है कि राजपूतों का झुकाव अपने आप ही भाजपा के केन्द्रीय मंत्री और मुरैना सांसद नरेन्द्र सिंह तोमर की ओर हो गया और कभी कांग्रेस का गढ़ रहा ( स्व अर्जुन सिंह और दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में ) आज वही ग्वालियर चम्बल भाजपा का गढ़ बन गया ...... सोचो प्यारे जरा दिल से और दिमाग से , सोचोगे तो सब समझ आ जायेगा , वरना मुर्दो को चोट नहीं लगा करती

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लेखक - जितेन्द्र विक्रम सिंह तोमर ( 52 से ) 
 
"उठो देव-बैठो देव" से लेकर 'कान पकड़ उठा बैठक 'करने की स्तिथि तक आने को "सहालग" कहते हे।  अर्थात 'देवोत्थानी एकादशी से देवशयनी एकादशी मध्य का समय ...! 
पता ही नहीं चलता कब कोनसे फूफा ओसारे की टूटी खाट पर पड़े पड़े राजपाल यादव से अर्जुन रामपाल बनने की कोशिश में जॉनी लीवर बने नजर आ जाए !
 
कुवारों-कुंवारियों के सावन के सोमबार से नवरात्रि तक किये अनगिनत उपवासो का फल कब प्रतिफल बन 'फलदान' का समय ले आये!भोजाइया दवे होंठो से ननद-देवरो को टटोलने लगती हे की 'द्वार रुकाई-काजल लगाई जेसी नेग भरी रश्मो में क्या मांग रखेंगी !
अब आधुनिक समय हे जियो के साथ वीडियो व्हाट्सऐप वीडियो पर विवाह से पूर्व ही भविष्य के युगलों में 33 psi दबाब से ट्युव ब्रस्ट होने तक की योजनाये क्रियांवन होने लगी हे ।
एकाएक लड़को का रुझान 'करामाती पेय' की दुकानों से सौंदर्य प्रसाधन की दुकानों की तरफ बड़ जाता हे।कोई कोई तो देशी 'नीबू नमक'-'मुल्तानी मिटटी' के उप्टन लगाकर घरवालो के लिए "भोंपा से पहले ही झोंटा" दिखने लगते हे ।
लड़कियो के फेसबुक अकाउंट एकाएक दिल्फ्टी शायरियों को त्याग 'महादेव भक्ति' की ओर उन्नत्ति से बढ़ने लगते हे।अब उन्हें बालो, चालो,फेसपेको,व्यूतिटिप्सो को सर्च करते हुए देखा जा सकता हे।हालांकि दिन रात मोबाइल बार्तालापो में रत रहकर सप्ताह में एक बार ही स्नान कर पाती हे।जो सारे गांव शहर में तितली बन स्वतन्त्र विचरण किया करती थी विवाह से पूर्व 'धुप से दुश्मनी' बना लेती की कही आगामी निखार की जगह "सुन्न भूरि" न हो जाए !
 
सहालग के समय में जहां घरवालो पर आर्थिक दबाब बनता हे बही हलवाइयों के क्लछो,डोंगो,पतीलो,चमचो की काया का पुनर्जन्म हो जाता हे।टेंट बालो का नास्ता कम भाव ज्यादा बड़ जाता हे और दूधियों के दूध में दूध कम पानी ज्यादा पाया जाता हे ।
 
एक से दशक पुरानी हुई भोजाई रूपी हबेलियो पर एकाएक पुन नई दुल्हन सा दिखने का संक्रमण दिखेगा जिसे एशियन पेंट से पुताई कर बन-ठन किया जाएगा किन्तु पेट की बड़ी हुई चर्वी और साढे तीन पसली से डेड पसली पर आये  फिगर को शायद ही कोई युक्ति पूर्ण कर पाये !
 
बड़े भाइयो बड़ी बुरी हालत होती हे इस सहालग में रूठे फ़ूफा से लेकर रूठी बीबियो की मनोती मुंनब्बल करते करते उन्हें पता ही नहीं चलता की कब दर्जी मास्टर ने पतलून का साइज छोटा सिल दिया या शेरवानी को मुशक महाराज सुभह के नाश्ते में रोशदान बना गए !
 
सहालग में असली आनन्द तो जो दूल्हा दुल्हन से छोटे होते हे उनका होता हे।दुल्हन की बहिनो के मन में दूल्हे को फूल फेंक कैसे मारा जाए जो दूल्हे के भाई की मुंडी से टकराये की जुगाड़ में समय निकलता हे तो दूल्हे के भाई काले सूट बाली को ताड़ूँगा या पिले बाली को ताड़ूँगा में बीत जाता हे।हालाँकि घुड़चढ़ी में करामाती पेय के साथ तालमेल बनाते हुए  ऐसे नागिन बनते हे की पहने हुए ब्लेजर का और नाली में भेद फोरेंसिक लेव भी न कर पाये हालाँकि नाचते हुए दूल्हे को धक्का दे खुद घोड़ी की  लगाम और रकाव थामने की तमन्ना थी ।
 
किसी किसी वारात् में फूफा के बाद कोई रुठने बाला व्यक्ति होता तो बह होते हे दूल्हे के बहिनोइ जिन्हें उनकी ससुराल बालो ने 'रसगुल्ला दिखाकर दहिबढ़ा' टिका दिया था हालाँकि बरात के खजांची भी यही होते हे और अपना दायित्व निभाते निभाते खुन्दक निकालते हे राइफल पर पूरा बिलडोरिया  फूँक खुद को प्राप्त रसगुल्ले और दहीबड़े का घाटा पूरा करने की कोशिश करते हुए देखे जाते हे ।
 
लड़कियो बालो की तरफ से कुछ लड़के ऐसे भी निस्वार्थ  सेवाभावी होते हे जो दौड़ दौड़ कर पानी से लेकर आसमानी पानी तक की व्यवस्था में लगे रहते हे। वास्तविकता में बो विवाह रूपी टूर्नामेंट के नॉकआउट से लेकर सेमीफाइनल तक प्रतियोगिता में रेफरी द्वारा मण्डप रूपी स्टेडियम से बाहर कर दिए गए होते हे।हालाँकि वारात् के स्वागत से लेकर दुल्हन बिदाई तक टकटकी बाँध दूल्हे की तरफ ऐसे देखते रहते की कह रहे हो "बेटा सेमीफाइनल तक हम भी खूब लोफ्टेट शॉट लगाये थे पर बाउंड्री बाल पर अंकल द्वारा कोट इन बोल्ड हो गए थे!,जाओ ले जाओ हमारी 'ख़ुशी' को ईश्वर करे तुम ससुरे दिन रात चोका-बर्तन करो,अब कुछ दिन बाद मामा बनने का इन्तेजार हम न करेंगे-अबकी सहालग में हम भी विवाह करेंगे!"
 
इन सबसे हटकर समधी (वरपक्ष)की विवाह तन्द्रा भंग जब होती जब अंग्रेजी यूनिफॉर्म में 'रट्टी बेंड' का बैज लगाये कोई देशी बन्दा कहता हे की "लो आपके बाजे बज गए अब हमारे पैसे दो..!"
 
तो मित्रो इस 'उठो देव बेठो देव 'से कान पकड़ उठा बैठक करने की सहालग रूपी सौगात पर बफर में ऐंठन भरी पूड़ियों जेसी शुभकामनाये .....
और नागिन डांस से तिगनी नाच तक की शुभकामनाओ युक्त सांत्वनाये ।
 
अंततः देवोत्थान पर पुरोहितो द्वारा पूजा में गाये गए कवित्त का भी उल्लेख कर दू 
 
उठो देव बैठो देव बाह्मनिया चट्काओ देव
क्वारन के विहाह करो,गौने करो,चाले करो !
काशी जाओ,प्रयाग जाओ,मथुरा-वृन्दावन जाओ,......चले जाओ बटेश्वर नाथ को ..!!
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वेबिनार में भारत के सभी 197 न्यायबंधु होंगें शामिल , ग्वालियर हाईकोर्ट क्षेत्र तथा अधीनस्थ सभी न्यायालयों के लिये इकलौते न्यायबंधु एडवोकेट  नरेन्द्र सिंह तोमर होंगें वेबिनार में शामिल

ग्वालियर / मुरैना 24 नवम्बर 2020 , न्याय विभाग भारत सरकार की ओर से प्रोबोनो लीगल सर्विसेज ( न्याय बंधु ) में कार्य कर रहे भारत के सभी 197 एडवोकेटों को ई मेल भेजकर अवगत कराया गया है कि उनके लिये न्याय विभाग भारत सरकार द्वारा एक अत्यंत उपयोगी व महत्वपूर्ण वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है , न्याय विभाग सभी प्रकार के न्याय संबंधी तथा इन्नोवेटिव कार्यों हेतु नोडल एजेंसी है । तथा सभी उच्च न्यायालयों के तथा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को नियुक्त करने / हटाने से लेकर न्याय बंधु / न्याय मित्र आदि कार्यों को एकलित व संकलित करने , सूचीबद्ध करने , न्यायालयों के आधुनिकीकरण आदि सभी कार्यों को करता है ।

न्याय बंधुओं ( प्रोबोनो लीगल सर्विसेज , नालसा – नेशनल लीगल सर्विसेज अथारिटीज एक्ट – 1987 के तहत कार्यरत ) के लिये  आयोजित इस वेबिनार में न्याय बंधुओं से उनके विचार, अनुभव , सलाह परामर्श आमंत्रित किये गये हैं । जिस सब पर यह वेबिनार केंद्रित होगा । इसके साथ ही आगे भविष्य में भी ऐसे वेबिनार आयोजित किये जाते रहेंगें ।

सभी न्यायबंधुओं ( प्रोबोनो लीगल सर्विसेज ) को भारत के संविधान की प्रस्तावना भी भेजी गयी है उस पर सभी न्याय बंधुओं के विचार व अनुभव भी आमंत्रित किये गये हैं ।

अब इस वेबिनार के साथ ही 26 नवम्बर से न्याय विभाग भारत सरकार की मोबाइल और वेब एप्लीकेशन न्याय बंधु ( प्रोबोनो लीगल सर्विसेज ) जो कि अभी तक प्ले स्टोर से डाउनलोड करना पड़ती थी , यह एप्लीकेशन अब उमंग एप्प में ही उपलब्ध रहेगी जिसे आसानी से न्यायबंधु तथा , विधिक सहायता के पात्र सभी हितग्राही बहुतायत से उपयोग कर सकेंगें और न्यायालयीन कार्य संपादित कर सकेंगें ।

उल्लेखनीय है कि प्रोबोनो लीगल सर्विसेज ( न्याय बंधु ) को न्याय विभाग भारत सरकार द्वारा सन 2017 में शुरू किया गया था । तब से यह सेवा निरंतर उत्तरोत्तर कार्यरत है और न्यायबंधुओं द्वारा अनेक न्यायालयों में प्रकरण इस सेवा के तहत निराकृत कराये ।  

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मकर राशि में हुये शनि गुरू इकठ्ठे दो धुर विरोधी गृह , शनि की राशि में एक साथ , शनि के घर में गुरू रहेंगें शनि के साथ, अतिचारी होकर

- नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनन्द’’ , एडवोकेट एवं

सी ई ओ तथा प्रघान संपादक , ग्वालियर टाइम्स ग्रुप

 

कल दिनांक 20 नवम्बर 2020 शुक्रवार को , गुरू जैसे बृहद प्रभावकारी गृह ने राशि परिवर्तन दोपहर करीब डेढ़ बजे किया और अब तक धनु राशि में गोचर कर रहे , चल रहे गुरू अब मकर राशि में आ चुके हैं ।

हालांकि धनु राशि  गुरू की ही राशि है और धनु  के स्वामी गुरू  के ही घर में गुरू अभी तक निवास कर रहे थे । और कल से वे अब शनि की ही दूसरी राशि अर्थात मकर राशि में ( शनि के ही घर में ) अब रहने आ गये हैं । इस घर की खास बात यह है कि इस राशि मकर का स्वामी यानि इस घर का मालिक भी यहीं इसी घर में पहले से ही मौजूद है । गुरू को अब शनि के साथ शनि के घर में आगामी समय में फिलहाल रहना है ।

ज्योतिषीय परिकल्पना और आकलनों के मुताबिक शनि और गुरू एक दूसरे के धुर विरोधी ग्रह हैं । और दोनों में परस्पर विरोध और वैमनस्यता रहती है । गुरू एकदम से शनि के विपरीत गुण रखते हैं ।

इस सारे ग्रहीय परिवर्तन में कुछ आवश्यक गणित पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है , मसलन दोनों ग्रहों के अंश और प्रभाव के साथ दोनों ग्रहों की चालें , अस्वाभाविक चालें जैसे कि वक्री, अस्त, उदय और अतिचारी चालें आदि ।

पहले तो यह कि मकर राशि में शनि , अपने खुद के ही घर में बैठे हैं , और गुरू अपनी नियमित चाल चलते चलते शनि के घर आ पहुंचा है और वहां अब शनि के साथ ही उसे वक्त गुजारना है , शनि इस समय आज की तारीख तक नवजात अवस्था में हैं अर्थात नवजात शिशु जैसे हाल व अवस्था में हैं , मतलब शनि इस वक्त बेअसर हैं और अपना अच्छा बुरा कुछ भी असर या प्रभाव दिखाने की हालत में नहीं हैं ।

और गुरू ने तो कल ही अपना गोचर इसी घर में यानि मकर राशि में शुरू किया है । इसलिये स्वाभाविकत: और प्राकृतिक रूप से गुरू कल ही जनमे हैं और वे भी इस समय आज दिनांक को नवजात शिशु वाली अवस्था में हैं । इसलिये वे प्रभावहीन और बेअसर हैं ।

इन दो नवजातों के एक घर में होने और फिलहाल एक ही पलकी में झूलने का अर्थ भी जानना ज्योतिषीय दृष्टिकोण से परम आवश्यक है , इसके लिये दोनों ग्रहों की चालों और गतियों का अध्ययन परम लाजमी है ।

विशेष खगोलीय घटना :- भारतीय ज्योतिषीय पद्धति जिसे चान्द्र पंचांग कहा जाता है और चन्द्रमा की गति पर आधारित तिथ्यादि से निर्धारित होता है , के मुताबिक तथा भारतीय सौर सिद्धांत के भी मुताबिक , इसके साथ ही वर्तमान आधुनिक विज्ञान ( फिजिक्स एंड एस्ट्रोनोमिकल ) वैज्ञानिक अनुसंधान केन्द्रों के मुताबिक 21- 22 जून को सबसे बड़ा दिन और इनके बीच की रात साल भर में सबसे छोटी रात होती है , इसी प्रकार 21 -22 दिसम्बर को सबसे छोटा दिन और इनके बीच की रात साल भर की सबसे बड़ी रात होती है ।

इसी 21 -22 दिसम्बर 2020 को इस साल यह दोनों नवजात ग्रह शनि और गुरू मकर राशि में एक साथ , एकदम समान अंशों पर आयेंगें । संयोगवश यह एक विचित्र स्थिति इन दोनों ग्रहों की उसी वक्त घटित होगी जब दिनमान और रात्रिमान में सालाना बदलाव हो रहा होगा । और इस दिन ही यह दोनों ग्रहों नवजात अवस्था से किशोर अवस्था की ओर बढ़ने से पहले एक ही समान अंश पर होंगें और एक दूसरे के साथ होगें एक ही राशि या एक ही घर में ।

ज्योतिष में समान अंश पर एक ही राशि में ग्रह होने पर उन ग्रहों की अमावस बन जाती है, अर्थात स्पष्ट है कि शनि और गुरू की पारस्परिक इस दिन अमावस बन जायेगी । कुल मिलाकर शनि और गुरू प्रभावित लोगों या इन दोनों से प्रभावित प्रकृति में उपलब्ध चीजों के लिये यह समय अमावस का समय होगा , जिसका अर्थ है कि होगा तो सब कुछ उपलब्ध , मगर दिखेगा नहीं । नजर नहीं आयेगा , न तो मार्ग और न मंजिल , कुछ भी नजर नहीं आयेगा ।

इस सब में गुरू की चाल स्पष्ट हो जाती है कि चंद रोज में गुरू का शनि को अमावस दे देने का अर्थ है कि गुरू की चाल अतिचारी रहेगी और गुरू का मकर राशि में गोचर प्रचंड गति से चलेगा , अतिचारी गुरू की चाल इतनी तेज होगी कि आज शून्य अंश पर चल रहे गुरू , एकदम से ही 05 अप्रेल 2021 को अर्थात महज चार साढ़े चार महीने में ही राशि बदल देंगें और शनि की ही दूसरी राशि कुम्भ राशि में यानि शनि के दूसरे घर में , प्रवेश कर जायेंगें । गुरू की इस दरम्यान अर्थात 05 अप्रेल तक की अतिचारी चाल काफी अर्थ रखती है और शनि के साथ चलते , शनि उस वक्त जब गुरू राशि बदलेंगें 05 अप्रेल को अपनी पूरी युवा अवस्था में 16- 17 अंश पर होगा ।

शनि और गुरू के इन अंशों और चालों के अनेक अर्थ और मायने हैं , शनि 07 जनवरी 2021 को अस्त होंगें और 09 फरवरी को उदित होंगें । शनि इस समय होशोहवास में किशोरावस्था में होंगें ।

इन ग्रहों के एक राशि में गोचर करने और अतिचारी गुरू के कारण राजनैति उथलपुथल और क्या क्या घटनाक्रम घटेंगे , आप पर सीधे सीधे इसका क्या असर पड़ेगा , इसकी व्याख्या और विश्लेषण -: -

( शेष भाग कल के अंक में जारी रहेगा ........... ... )

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शिकायतों को महज 500 से 800 रूपये लेकर करा दिया जाता है फोर्सली फर्जी तरीके से सी एम हेल्पलाइन में क्लोज

मुरैना, 15 नवम्बर ( ग्वालियर टाइम्स ) मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के चंबल संभाग के वितरण में जो भी क्रम जारी है , उसमें कांग्रेस की कमलनाथ सरकार में हुई अयोग्य व भ्रष्ट अफसरों और फील्ड में बिजली कर्मियों की पदस्थी तो खैर अपने आप में भ्रष्टाचार का एक नायाब नमूना रही है , सी एम हेल्पलाइन की शिकायतों को महज 500 से 800 रूपये लेकर ( हमारी आंखों देखी ) मुरैना कलेक्ट्रेट के गेट स्थित एन आई सी के सेवा केन्द्र से हर शिकायत को फर्जी तरीके से फोर्सली क्लोज कर यह कहा जाता रहा कि (  कोई भी ) शिकायतकर्ता (साले ) को घुमाते रहेंगें एक नंबर से चार नंबर तक ऐसे ही , तुम पैसे दिये जाओ , हम यूं ही क्लोज करते रहेंगें ।

यह वाकया उस वक्त का है जब एक पुलिस शिकायत के संबंध में हम सी एस पी मुरैना को अपना बयान दर्ज कराने गये थे , तब संयोग से सी एस पी मुरैना ने हमें वहां उस कक्ष में भेज दिया था और दो चार घंटे हमने उस कक्ष की कार्यवाही और प्रणाली को खुद अपनी आंखों से देखा , संयोग से कक्ष प्रभारी हमें पहचानता नहीं था सो धड़ल्ले से हमारे सामने ही खेल करता और बताता रहा ।

बिजली कंपनी का भ्रष्टाचार और घटिया इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा अवैध व फोर्सली फर्जी बिल देना तो खैर किसी से छिपा नहीं है , न आम जनता से और न किसी राजनेता से , न न्यायालय से और न किसी भी जांच एजेंसी से । न थ्री फेज सप्लाई है कहीं और न किसी उपभोक्ता के थ्री फेज बिल लगातार भुगतान के बावजूद ही थ्री फेज सप्लाई ही मिल रही है , मटरूआ , करूआ हों या कोई और शराब में 24 घंटे मस्त पड़े बिजली अफसर और बिजली कर्मीयों के शौक और मौज केवल दारू तक ही हो ऐसा नहीं है , औरतखोरी और रिश्वत , भ्रष्टाचार के अलावा मांस , मुर्गा और बकरे के शौकीन , जहां फैक्ट्रियों और उद्योगों को जमकर बिजली चोरी करा कर रोजाना ही कंपनी को अपने बाप का माल समझ कर बेच रहे हैं तो उनके बिजली बिलों को घरेलू आम उपभोक्ताओं पर एडजस्टमेण्ट के नाम और आकलित खपत के नाम पर फर्जी तरीके से लाद देता है और चोरों को साहूकार तथा साहूकारों को चोर बनाता रहता है ।

भ्रष्टाचार और अंधेरगर्दी का आलम ये है कि घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली तो कभी मिलती ही नहीं है और केवल बिल मिलते हैं , जबकि उद्योगों और फैक्ट्रियों के हर महीने के लाखों करोड़ों के बिलों की चोरी करवा कर , एडजस्टमेण्ट के लिये आकलित खपत का फर्जी आंकड़ा बना कर धर दिये जाते हैं ।

बिजली आम आदमी को न तो कमलनाथ की कांग्रेस सरकार दे पाई और वही नतीजा भी हालिया उपचुनाव परिणामों में कमनाथ सरकार ने भोगा भी, और उन्हीं अंधेरगर्द और भ्रष्ट अफसरों तथा बिजली कर्मियों की तैनाती और उनकी अयोग्यता, नाकारा और निकम्मापन और भ्रष्टाचार  अब उपचुनाव होते ही फिर से सिरदर्द बन कर उठा है ।

उपचुनावों से पहले रोजाना की जा रही आठ दस घंटों की अघोषित अंधाधुंध  बिजली कटौती , उपचुनाव और दीवाली गुजरते ही फिर से आज 15 नवम्बर सेफिर से चालू हो गयी है , मुरैना में ( गांधी कालोनी . ग्वालियर टाइम्स के प्रधान कार्यालय के आसपास क्षेत्र की ) आज सुबह 9:30 बजे  बिजली काटने के बाद , शाम 6:15 बजे से बिजली फिर काट दी गयी  जो कि इस समय इस खबर के लिखे और प्रकाशित किये जाने के वक्त तक पूरी तरह बंद है , ग्वालियर टाइम्स के प्रधान कार्यालय पर हालांकि 3 फेज का कनेक्शन सन 1995 से है , और 3 फेज का ही बिजली भुगतान किया जाता रहा है मगर बिजली केवल सिंगल फेज के ही 3 फेज बनाकर दी जाती है अर्थात 3 फेज की केबल को पोल पर तीनों फेजों को एक ही सिंगल फेज से जोड़कर दी जाती है । जिसकी तमाम शिकायतें सी एम हेल्पलाइन में की गईं और पी जी पोर्टल भारत सरकार में की गईं , भ्रष्ट अफसरों ने सी एम हेल्पलाइन की सभी शिकायतें बिना किसी निराकरण के ही फोर्सली उटे सीधे जवाब देकर बंद करवा दीं और पी जी पोर्टल भारत सरकार की किसी भी शिकायत का आज तक जवाब ही नहीं दिया , वहां सभी शिकायतें आज दिनांक तक अनिराकृत और पेंडिंग तथा जवाबहीन हैं । जबकि भारत सरकार द्वारा म. प्र. शासन के प्रमुख सचिव ऊर्जा से तत्समय ही जवाब तलब किया जा चुका है लेकिन आज दिनांक तक किसी शिकायत का जवाब देने की जहमत म.प्र. शासन ने नहीं उठाई जिससे आगे हाई कोर्ट जाने का रास्ता खुले ।

इस भ्रष्टाचार की और निकम्मेपन तथा अयोग्यता की ही देन है कि आज चम्बल अंधेरे में डूबी हुई है ।  

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म प्र के सभी जिला सत्र नयायालय आगामी 23 नवंबर से पूर्व की तरह खुलेंगें , और 11 प्रकार के केसों की फिलहाल सुनवाई करेंगें , जिला अभिभाषक संघों द्वारा सभी एडवोकेटों से अपने नियमित कामकाज पर अदालतों में उपस्थित होने काआगृह किया है । 

म प्र उच्च न्ययायालय द्वारा जारी अपने आदेश में सभी जिला सत्र न्यायालयों को दिनांक 23 नवम्बर से 5 दिसम्बर तक खोले जाने और 11 प्रकार के केसों की नियमित सुनवाई का आदेश जारी किया है , यह सभी जिला सत्र न्यायालय 23 नवंबर से 5 दिसम्बर तक अल्टरनेट दिवस ( एक दिन छोड़कर- हर तीसरे दिन - एक अदालत एक दिन उसके बाद वही अदालत तीसरे दिन ) को प्रायोगिक ( एक्सपेरीमेंटल ) आधार पर खोलें जायेंगें ( अनुभव अच्छा रहा तो आदेश 5 दिसम्बर के बाद क्न्टीन्यू किया जायेगा ) 

जिन 11 प्रकार के केसों को नियमित रूप से सुना जायेगा उनमें - 

1. रिमांड , जमानत और सुपुर्दगीनामा संबंधी प्रकरण

2. क्रिमिनल तथा सिविल अपीलें और निगरानी याचिकायें 

3. जेल में बंद कैदियों से संबंधित सभी प्रकार के आवेदन तथा ट्रायल ( विचाराधीन बंदी) मैटर्स 

4.  05 साल से ज्यादा पुराने सभी क्रिमिनल मामले (क्रिमिनल केसेज) 

5. मोटर व्हीकल एक्ट (दुर्घटना क्लेम)  के तहत राशि ( अमाउंट ) के भुगतान किये जाने से संबंधित मामले जिनमें कि राशि जमा हो चुकी है 

 6. सी आर पी सी की धारा 125 तथा 128 से संबंधित मामले 

7. जुवैनाइल जस्टिस बोर्ड ( बाल अपराधी - किशोर न्याय संरक्षण अधिनियम ) से संबंधित मामले 

8. दत्तक ग्रहण ( गोदनामा ) से संबंधित मामले 

9. राजीनामा जिन मामलों में पेश किया जा चुका है वह सभी मामले 

10. सभी प्रकार के सिविल और क्रिमनल मामले जिनमें सुप्रीम कोर्ट और/ या हाई कोर्ट ने सुनवाई करने / निपटारा/ निराकरण के लिये समय सीमा निर्धारित की है या आदेश/ निर्देश दिया है  

11. अन्य सभी क्रिमनल और सिविल उच्च प्राथमिकता के मामले जिनमें न्यायालय को लगता है कि इस प्रकार के किसी मामले की सुनवाई उच्च प्राथमिकता और अत्यावश्यक मामले के रूप में की जाये 

सभी जिला सत्र न्यायालयों में कितने केसेज अदालतों द्वारा सुने जायें यह जिला सत्र न्यायाधीश तय ( निर्घारित ) करेंगें 

1. यह भी कि जहां फिजिकल सुनवाई अदालतों द्वारा की जायेगी वहीं साथ ही , वीडियो कान्फ्रेंसिंग तथा अन्य सुविधाजनक प्रकार से एडवोकेटों/ याचीयों/फरियादियों/परिवादियों के लिये)  चल रही वर्चुअल ( इंटरनेट/ या अन्य प्रकार से) भी सतत रूप से जारी रहेगी 

2. आगामी आदेश तक , कोरोना के खतरे के मद्देनजर अदालतों में हाजिर होने वाले एडवोकेटों , परिवादियों/फरियादियों/याचीयों , गवाहों के फाइलों या आदेश पत्रिकाओं पर हस्ताक्षर नहीं कराये जायेंगें , और संबंधित न्यायालय द्वारा उनकी उपस्थिति कोर्ट की आर्डरशीट पर अभिलेखित की जायेगी और कोर्ट फाइल में रखी जायेगी । 

3. सभी जिला सत्र न्यायाधीश तथा अन्य आउट लेयिंग स्टेशन्स ( जिला सत्र न्यायालय के अलावा अन्य न्यायालय - तहसील स्तर आदि पर स्थित न्यायालय ) यह सुनिश्चित करेंगें और निर्धारित करेंगें कि , न्यायायिक अधिकारीयों ( जूडिशिल आफिसर्स ) , एडवोकेटस / लायर्स, न्यायालय का स्टाफ , लिटिगेन्टस आदि के न्यायालय परिसर तथा कोर्ट रूम में प्रवेश तथा निर्गम ( अंदर आने और बाहर जाने तथा दोनों के दरम्यान ) किसी भी प्रकार की भीड़ न हो और सोशल डिस्टेंसिंग कायम रहे तथा सभी प्रकार के सावधानी और सुरक्षा संबंधी समस्त उपाय तय करेंगें । और कोर्ट परिसर में तथा कोर्ट रूम में सीमित लोग रहें तथा किसी भी दशा में भीड़ भाड़ न हो ।     

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मघ्यप्रदेश उच्च न्यायालय में तारीख 11 नवंबर शाम 5 बजे से दिनांक 18 नवम्बर के सुबह 10 बजे तक सभी प्रकार की फिजिकल फाइलिंग / ई फाइलिंग ( केसेज/ एप्लीकेशन्स/उाक्यूमेंटस ) के लिये अवकाश घोषित किया है , अब सभी प्रकार की फायलिंग 18 नवम्बर को सुबह 10 बजे से शुरू होगी । हाई कोर्ट म प्र जबलपुर द्वारा यह परिपत्र मुख्यपीठ जबलपुर सहित बेंच ग्वालियर और बेंच इंदौर के लिये जारी किया है । आदेश/ मेमो / परिपत्र निम्नानुसार मूलत: है । 

As directed by Hon’ble the Acting Chief Justice, filing of the Cases / applications / Documents by way of Physical filing or by e-filing mode will be kept in abeyance during the Deepawali holidays from 05:00 p.m. of 11.11.2020 (Wednesday) to 10:00 a.m. of 18.11.2020 (Wednesday) at Principal Seat Jabalpur and Benches at Indore & Gwalior.

Sd/- 10.11.2020 (MANOJ KUMAR SHRIVASTAVA) PRINCIPAL REGISTRAR (JUDICIAL)  

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  भरतपुर के उच्चैन थाना के प्रभारी कई दिनों से छुट्टी लेने की गुहार लगा रहा थे, लेकिन एएसपी ने उसे छुट्टी नहीं दी. जिसके बाद वह इस कदर तनाव में आए की अचानक उसकी तबीयत ख़राब होने पर अस्पताल लाया गया जहां उनकी मौत हो गयी. अब छुट्टी नहीं देने में देरी की वजह के कारण की जांच में पुलिस महानिरीक्षक संजीव नर्जरी जुट गए हैं.

बताया गया है कि उच्चैन थाना प्रभारी होशियार सिंह जिनकी हर्ट अटैक के कारण मौत हुई है और जानकारी में आया है की उनके पुत्र की शादी की तारीख 25 नवम्बर की थी, जिसके लिए वह छुट्टी के लिए एसपी कार्यालय के चक्कर काट रहे थे.

होशियार सिंह 13 नवंबर से परमानेंट लीव मांग रहे थे लेकिन एएसपी द्वारा छुट्टी की मना कर दी जिससे थाना प्रभारी होशियार सिंह तनाव में आ गए और उनकी आज सुबह अचानक तबीयत खराब हो गई. थाने के स्टाफ के द्वारा उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई. उसके बाद शव की कोविड-19 की जांच कराने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आई है.

होशियार सिंह करौली के मासलपुर थाने में तैनात था जो हाल ही में भरतपुर पोस्टिंग होकर आया था. एसपी कार्यालय का कहना है की उसकी पर्सनल फाइल आने में देरी होने से छुट्टी देने में देरी हुई है फिलहाल पुलिस ने मृतक के परिजनों को इस घटना के बारे में सूचित कर दिया था जिसके बाद मृतक के परिजन पहुंचे और शव परिजनों को सौंप दिया मृतक के कोरोना पॉजिटिव आने से शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका शव को पैक कर परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया.

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