डायरी आलेख/समाचार

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  👉 _*त्याग का रहस्य।*_ 👈 एक बार महर्षि नारद ज्ञान का प्रचार करते हुए किसी सघन बन में जा पहुँचे। वहाँ उन्होंने एक बहुत बड़ा घनी छाया वाला सेमर का वृक्ष देखा और उसकी छाया में विश्राम करने के लिए ठहर गये। नारदजी को उसकी शीतल छाया में आराम करके बड़ा आनन्द हुआ, वे उसके वैभव की भूरि भूरि प्रशंसा करने लगे। उन्होंने उससे पूछा कि.. “वृक्ष राज तुम्हारा इतना बड़ा वैभव किस प्रकार सुस्थिर रहता है? पवन तुम्हें गिराती क्यों नहीं?” https://chat.whatsapp.com/Kx5M5YA3NSxIAA8fBDvVYfसेमर के वृक्ष ने हंसते हुए ऋषि के प्रश्न का उत्तर दिया कि- “भगवान्! बेचारे पवन की कोई सामर्थ्य नहीं कि वह मेरा बाल भी बाँका कर सके। वह मुझे किसी प्रकार गिरा नहीं सकता।” नारदजी को लगा कि सेमर का वृक्ष अभिमान के नशे में ऐसे वचन बोल रहा है। उन्हें यह उचित प्रतीत न हुआ और झुँझलाते हुए सुरलोक को चले गये। सुरपुर में जाकर नारदजी ने पवन से कहा.. ‘अमुक वृक्ष अभिमान पूर्वक दर्प वचन बोलता हुआ आपकी निन्दा करता है, सो उसका अभिमान दूर करना चाहिए।‘ पवन को अपनी निन्दा करने वाले पर बहुत क्रोध आया और वह उस वृक्ष को उखाड़ फेंकने के लिए बड़े प्रबल प्रवाह के साथ आँधी तूफान की तरह चल दिया। सेमर का वृक्ष बड़ा तपस्वी परोपकारी और ज्ञानी था, उसे भावी संकट की पूर्व सूचना मिल गई। वृक्ष ने अपने बचने का उपाय तुरन्त ही कर लिया। उसने अपने सारे पत्ते झाड़ा डाले और ठूंठ की तरह खड़ा हो गया। पवन आया उसने बहुत प्रयत्न किया पर ढूँठ का कुछ भी बिगाड़ न सका। अन्ततः उसे निराश होकर लौट जाना पड़ा। कुछ दिन पश्चात् नारदजी उस वृक्ष का परिणाम देखने के लिए उसी बन में फिर पहुँचे, पर वहाँ उन्होंने देखा कि वृक्ष ज्यों का त्यों हरा भरा खड़ा है। नारदजी को इस पर बड़ा आश्चर्य हुआ। उन्होंने सेमर से पूछा- “पवन ने सारी शक्ति के साथ तुम्हें उखाड़ने की चेष्टा की थी पर तुम तो अभी तक ज्यों के त्यों खड़े हुए हो, इसका क्या रहस्य है?” वृक्ष ने नारदजी को प्रणाम किया और नम्रता पूर्वक निवेदन किया- “ऋषिराज! मेरे पास इतना वैभव है पर मैं इसके मोह में बँधा हुआ नहीं हूँ। संसार की सेवा के लिए इतने पत्तों को धारण किये हुए हूँ, परन्तु जब जरूरत समझता हूँ इस सारे वैभव को बिना किसी हिचकिचाहट के त्याग देता हूँ और ठूँठ बन जाता हूँ। मुझे वैभव का गर्व नहीं था वरन् अपने ठूँठ होने का अभिमान था इसीलिए मैंने पवन की अपेक्षा अपनी सामर्थ्य को अधिक बताया था। आप देख रहे हैं कि उसी निर्लिप्त कर्मयोग के कारण मैं पवन की प्रचंड टक्कर सहता हुआ भी यथा पूर्व खड़ा हुआ हूँ।“ नारदजी समझ गये कि संसार में वैभव रखना, धनवान होना कोई बुरी बात नहीं है। इससे तो बहुत से शुभ कार्य हो सकते हैं। बुराई तो धन के अभिमान में डूब जाने और उससे मोह करने में है। यदि कोई व्यक्ति धनी होते हुए भी मन से पवित्र रहे तो वह एक प्रकार का साधु ही है। ऐसे जल में कमल की तरह निर्लिप्त रहने वाले कर्मयोगी साधु के लिए घर ही तपोभूमि है। साभार :प्रेरक कहानियां
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भोपाल । नये मंडी एक्ट से आई विसंगति को कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री कमल पटेल ने व्यापारियों से चर्चा के बाद दूर कर लिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सहमति के बाद अब मध्य प्रदेश की मंडियों में मंडी टेक्स 1 रुपये 50 पैसे के स्थान पर केवल 50 पैसे वसूला जाएगा, इसके साथ ही निराश्रित सहायता के 20 पैसे वसूलना भी बंद कर दिया गया है। राज्य सरकार के इस फैसले के बाद पिछले 12 दिन से हड़ताल कर रहे व्यापारी मंडी लौट आए हैं। कृषि मंत्री कमल पटेल ने इस फैसले को अपने जन्मदिन का तोहफा बताते हुए कहा कि नये मंडी एक्ट से अब किसानों को कहीं भी अपनी फसल बेचने की छूट है, अनाज के भंडारण के लिए लायसेंस की बाध्यता भी खत्म हो गई है। कमल पटेल ने बताया कि मंडी के बाहर कारोबार पर कोई मंडी टेक्स नहीं था लेकिन मंडी में 1 रुपये 50 पैसे मंडी टेक्स देने के साथ ही 20 पैसे निराश्रित सहायता शुल्क देना पड़ता था, व्यापारी मंडी टेक्स घटाने की मांग को लेकर पिछले 12 दिन से हड़ताल पर थे। सकल अनाज दलहन तिलहन व्यापार समिति के अध्यक्ष गोपालदास अग्रवाल ने कहा कि सरकार के इस फैसले से व्यापारियों को राहत मिलने के साथ मंडियों को बचाने का रास्ता भी खुला है। श्री अग्रवाल ने कहा कि किसानों का मंडियों पर भरोसा है, किसानों के कल्याण के लिए मंडियों का अस्तित्व बचा रहे इसके लिए वह मंडी शुल्क जारी रखना चाहते हैं, लेकिन खुले बाजार की प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए वह इसमें कमी चाहते थे उनकी मांग आज कृषि मंत्री कमल पटेल से चर्चा और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सहमति के बाद पूरी हो गई है, इससे मंडियों में व्यापार फिर शुरू हो गया है। श्री अग्रवाल ने कहा कि सरकार के फैसले के बाद राजस्व आय की छह माह बाद समीक्षा होगी इसके बाद मंडियों को बचाए रखने के लिए नये सिरे से निर्णय लिया जाएगा।
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पीड़िता मनीषा बाल्मीकि का पुलिस थाने में दिया गया पहला बयान , स्वयं मनीषा बाल्मीकि ने दिया ...... थाने में हुये पहले बयान की वीडियो रिकार्डिंग..... मनीषा बाल्मीकि ने ..... किसी भी प्रकार से किसी ने रैप किया ..... यह कहा ही नहीं ..... मनीषा के बयान के अनुसार .... जबरई नहीं करन दई ...... तासों टेंटुआ दाब दओ ..... मतलब रैप हुआ नहीं ...... और उस समय उसे मारा तो वह जान से मरी नहीं..
https://www.facebook.com/Sahyogifriends/videos/662416441366521पीड़िता मनीषा बाल्मीकि का पुलिस थाने में दिया गया पहला बयान , स्वयं मनीषा बाल्मीकि ने दिया ...... थाने में हुये पहले बयान की वीडियो रिकार्डिंग..... मनीषा बाल्मीकि ने ..... किसी भी प्रकार से किसी ने रैप किया ..... यह कहा ही नहीं ..... मनीषा के बयान के अनुसार .... जबरई नहीं करन दई ...... तासों टेंटुआ दाब दओ ..... मतलब रैप हुआ नहीं ...... और उस समय उसे मारा तो वह जान से मरी नहीं.. https://www.facebook.com/Sahyogifriends/videos/662416441366521

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बॉलीवुड एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा ने डायरेक्टर अनुराग कश्यप के खिलाफ यौन शोषण का आरोप लगानी वाली एक्ट्रेस, कमाल आर खान सहित अन्य के खिलाफ 1.1 करोड़ रुपये का मानहानि का केस किया है। इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के जज अनिल मेनन के सामने सुनवाई हुई। इस दौरान ऋचा ने जिनके खिलाफ मानहानि का केस किया है, उनकी तरफ से कोर्ट में कोई पेश नहीं हुआ। ऐसे में कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीफ 7 अक्टूबर तक के लिए टाल दी है।

दरअसल, मामला यह है कि एक्ट्रेस ने अनुराग कश्यप के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते वक्त कई एक्ट्रेस के नाम लिए थे। उन्होंने अनुराग पर आरोप लगाते हुए कहा था कि ऐसी कई एक्ट्रेसेस हैं, जो काम करने के लिए अनुराग के साथ कुछ भी करने के लिए तैयार हैं। इस दौरान एक्ट्रेस ने ऋचा चड्ढा का नाम भी लिया था। एक्ट्रेस के इसी बयान के खिलाफ ऋचा चड्ढा ने मानहानि का केस किया है।

5:48:19 PM

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इस महामारी में भी रक्तदान शिविर आयोजित किये जा रहे हैं :दीपिका आगरा (उप्र) केन्द्रीय महिला मंडल महामंत्राणी दीपिका डा. प्रवीण गुप्ता ने बताया कि जैसा कि हम सब को विदित है! देश में वैश्विक महामारी के चलते हुए महासभा के अंतर्गत होने वाले महासभा अध्यक्ष, केंद्रीय अध्यक्षा और युवादल अध्यक्ष के चुनाव स्थगित कर दिए गए थे! इसी बीच गत दिवश 5 अक्टूबर को अखिल भारतीय माथुर वैश्य महासभा के अंतर्गत महासभा भवन की प्रबंध समिति व संचालन समिति की आम बैठक आहूत की गई, जिसमें सरकार द्वारा जारी कोरोना गाईड लाईन के मुताबिक सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा गया, बैठक में उपस्थित सभी सम्मानीय पदाधिकारी व सदस्यों ने मास्क लगाकर बैठक में हिस्सा लिया! बैठक में तय किया गया कि इस महामारी के समय में भी महासभा के आव्हान पर पूरे देश में रक्तदान शिविर भी आयोजित किये जा रहे हैं,जिसमें हमारी मातृशक्ति भी काफी योगदान दे रही हैैं कहीं रक्तदान संयोजिका के रूप में तो कहीं रक्तदान प्रभारी के रूप में और साथ में रक्तदान भी कर रहीं हैं! मैं सभी अपनी बहनों को दिल से धन्यवाद देती हूं क्योंकि ऐसा कर वे महासभा और महिला मंडल का देश में नाम रोशन कर रही हैं। उन्होने बताया कि भवन प्रबंध समिति के चुनाव 7 अक्टूबर से प्रारंभ होने जा रहे हैं।इस पर भी चर्चा की गई! कौन कहता है जिंदगी थम जाती हैं ⁉️ बैठक में महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रघुनाथ प्रसाद गुप्ता, श्री कुलदीप गुप्ता महामंत्री,भूतपूर्व केंद्रीय महामंत्राणी, भवन मंत्री, भवन कोषाध्यक्ष जी,भवन उपाध्यक्ष सहित समिति के गणमान्य सदस्य मौजूद थे। दीपिका डॉ प्रवीण गुप्ता

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🌸🌺🌸🌺🌸🌺🌸 *👉🏿नालायक बेटा➖* "बेटा , हमारा एक्सीडेंट हो गया है ।मुझे ज्यादा चोट नहीं आई पर तेरी मां की हालत बहुत खराब है। tकुछ पैसों की जरुरत है और तेरी माँ को खून चढ़ाना है।"बासठ साल के माधव जी ने अपने बड़े बेटे से फोन पर कहा।"पापा, मैं बहुत व्यस्त हूँ आजकल।मेरा आना नहीं हो सकेगा।मुझे विदेश मे नौकरी का पैकेज मिला है तो उसी की तैयारी कर रहा हूँ।आपका भी तो यही सपना था ना? इसलिये हाथ भी तंग चल रहा है।पैसे की व्यवस्था कर लीजिए मैं बाद मे दे दूँगा।"उनके बडे़ इंजिनियर बेटे ने जबाब दिया।उन्होनें अपने दूसरे डाॅक्टर बेटे को फोन किया तो उसने भी आने से मना कर दिया । उसे अपनी ससुराल में शादी मे जाना था।हाँ इतना जरुर कहा कि पैसों की चिंता मत कीजिए मैं भिजवा दूँगा।यह अलग बात है कि उसने कभी पैसे नहीं भिजवाए।उन्होंने बहुत मायूसी से फोन रख दिया।अब उस नालालक को फोन करके क्या फायदा।जब ये दो लायक बेटे कुछ नहीं कर रहे तो वो नालायक क्या कर लेगा?उन्होंने सोचा और बोझिल कदमों से अस्पताल में पत्नी के पास पहुंचे और कुर्सी पर ढेर हो गये।पुरानी बातें याद आने लगे, ------------------- 🌹माधव राय जी स्कूल मे शिक्षक थे।उनके तीन बेटे और एक बेटी थी।बड़ा इंजिनियर और मझला डाक्टर था।दोनों की शादी बड़े घराने में हुई थी।दोनो अपनी पत्नियों के साथ अलग अलग शहरों मेंरहते थे।बेटी की शादी भी उन्होंने खूब धूमधाम से की थी।सबसे छोटा बेटा पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाया था।ग्यारहवीं के बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी और घर में ही रहने लगा। कहता था मुझे नौकरी नहीं करनी अपने माता पिता की सेवा करनी है पर मास्टर साहब उससे बहुत नाराज रहते थे।उन्होंने उसका नाम नालायक रख दिया था ।दोनों बड़े भाई पिता के आज्ञाकारी थे पर वह गलत बात पर उनसे भी बहस कर बैठता था। इसलिये माधव जी उसे पसंद नही करते थे।जब माधव जी रिटायर हुए तो जमा पुँजी कुछ भी नही थी।सारी बचत दोनों बच्चों की उच्च शिक्षा और बेटी की शादी मे खर्च हो गई थी।शहर में एक घर , थोड़ी जमीन और गाँव में थोडी सी जमीन थी।घर का खर्च उनके पेंशन से चल रहा था।माधव जी को जब लगा कि छोटा सुधरने वाला नही तो उन्होंने बँटवारा कर दिया और उसके हिस्से की जमीन उसे देकर उसे गाँव में ही रहने भेज दिया। हालाँकि वह जाना नहीं चाहता था पर पिता की जिद के आगे झुक गया और गाँव में ही झोपड़ी बनाकर रहने लगा।माधव जी सबसे अपने दोनो होनहार और लायक बेटों की बड़ाई किया करते।उनका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता था।पर उस नालायक का नाम भी नहीं लेते थे।दो दिन पहले दोनों पति पत्नी का एक्सीडेन्ट हो गया था । वह अपनी पत्नी के साथ सरकारी अस्पताल मे भर्ती थे।डाॅक्टर ने उनकी पत्नी को आपरेशन करने को कहा था। ------------------"पापा, पापा!" सुन कर तंद्रा टुटी तो देखा सामने वही नालायक खड़ा था।उन्होंने गुस्से से मुँह फेर लिया।पर उसने पापा के पैर छुए और रोते हुए बोला "पापा आपने इस नालायक को क्यों नहीं बताया? पर मैने भी आप लोगों पर जासूस छोड़ रखे हैं।खबर मिलते ही भागा आया हूँ।"पापा के विरोध के वावजूद उसने उनको एक बड़े अस्पताल मे भरती कराया।माँ का आपरेशन कराया ।अपना खून दिया । दिन रात उनकी सेवा में लगा रहता कि एक दिन वह गायब हो गया।वह उसके बारे मे फिर बुरा सोचने लगे थे कि तीसरे दिन वह वापस आ गया।महीने भर में ही माँ एकदम भली चंगी हो गई।वह अस्पताल से छुट्टी लेकर उन लोगों को घर ले आया। माधव जी के पूछने पर बता दिया कि खैराती अस्पताल था पैसे नहीं लगे हैं।घर मे नौकरानी थी ही।वह उन लोगों को छोड़ कर वापस गाँव चला गया।------------------- धीरे धीरे सब कुछ सामान्य हो गया।एक दिन यूँ ही उनके मन मे आया कि उस नालायक की खबर ली जाए।दोनों जब गाँव के खेत पर पहुँचे तो झोपड़ी में ताला देख कर चौंके।उनके खेत मे काम कर रहे आदमी से पूछा तो उसने कहा "यह खेत अब मेरे हैं।""क्या?पर यह खेत तो...." उन्हे बहुत आश्चर्य हुआ।"हाँ।उसकी माँ की तबीयत बहुत खराब थी। उसके पास पैसे नहीं थे तो उसने अपने सारे खेत बेच दिये। वह रोजी रोटी की तलाश में दूसरे शहर चला गया है।बस यह झोपडी उसके पास रह गई है।यह रही उसकी चाबी।"उस आदमी ने कहा।वह झोपड़ी मे दाखिल हुये तो बरबस उस नालायक की याद आ गई।टेबल पर पड़ा लिफाफा खोल कर देखा तो उसमे रखा अस्पताल का नौ लाख का बिल उनको मुँह चिढ़ाने लगा।उन्होंने अपनी पत्नी से कहा - "जानकी तुम्हारा बेटा नालायक तो था ही झूठा भी है।"अचानक उनकी आँखों से आँसू गिरने लगे और वह जोर से चिल्लाये -"तूँ कहाँ चला गया नालायक, अपने पापा को छोड़ कर।एक बार वापस आ जा फिर मैं तुझे कहीं नही जाने दूँगा।"उनकी पत्नी के आँसू भी बहे जा रहे थे।*और माधव जी को इंतजार था अपने नालायक बेटे को अपने गले से लगाने का।* *सचमुच बहुत नालायक था वो,,,,ये पोस्ट पढ़ते वक्त अगर आँखें नम हुई तो समझो हमारे अंदर भी एक ऩालायक है,,,* साभार

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