डायरी आलेख/समाचार

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   इंदौर, 12 नवंबर , अवैध रूप से बनाए गए आश्रम को ढहाए जाने के दौरान यहां एहतियातन गिरफ्तार कर केंद्रीय जेल भेजे गए कम्प्यूटर बाबा को बृहस्पतिवार को नए मामले में इस कारागार के भीतर ही औपचारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रशांत चौबे ने बताया कि यह मामला गांधी नगर थाना क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत के सचिव की रिपोर्ट पर बृहस्पतिवार को ही दर्ज किया गया। यह सचिव अनुसूचित जाति वर्ग से ताल्लुक रखता है। उन्होंने बताया कि "कम्प्यूटर बाबा" के रूप में मशहूर नामदेव दास त्यागी (54) और उनके साथियों के खिलाफ आरोप है कि रविवार को पुलिस और प्रशासन के दल के मौके पर पहुंचने से पहले उन्होंने ग्राम पंचायत के लोगों के साथ अभद्रता, मारपीट और गाली-गलौज की। ये लोग सरकारी जमीन पर आश्रम के रूप में किया गया अतिक्रमण हटाने गए थे। चौबे ने बताया कि कम्प्यूटर बाबा और उनके कुछ साथियों के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 186 (लोक सेवक के लोक कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालना), 353 (लोक सेवकों कोभयभीत कर उन्हें उनके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए उन पर हमला), 323 (मारपीट), 294 (गाली-गलौज) और 506 (आपराधिक धमकी) के साथ ही अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के संबद्ध प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि इस मामले में प्रशासन के एक अनुविभागीय मजिस्ट्रेट से मंजूरी लेकर केंद्रीय जेल में ही कम्प्यूटर बाबा की औपचारिक गिरफ्तारी की गई जहां वह पिछले छह दिन से न्यायिक हिरासत में बंद हैं। अधिकारियों ने बताया कि एसडीएम की अदालत कम्प्यूटर बाबा को जमानत देने से इनकार कर चुकी है। इसके बाद अपर सत्र न्यायालय उनकी पुनरीक्षण याचिका खारिज कर चुका है। गौरतलब है कि पुलिस और प्रशासन के दल ने इंदौर शहर से सटे जम्बूर्डी हप्सी गांव में सरकारी जमीन पर बने कम्प्यूटर बाबा के अवैध आश्रम को रविवार को जमींदोज कर दिया था। इसके साथ ही, भाजपा और कांग्रेस की पिछली सरकारों में राज्य मंत्री के दर्जे से नवाजे गए बाबा को एहतियातन गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

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 फिल्म रोटी , राजेश खन्ना की , इन उचपुनावों पर ठीक ही बैठती है , इस फिल्म के दो सबसे बेहतर संवाद हैं और बहुत लोकप्रिय भी - 1. मंगल सिंह मंगल को पैदा हुआ और मंगल को ही मरेगा 2. दूसरा है - फिर मिलेंगें  दोनों ही संवाद इन विधानसभा चुनावों के परिप्रेक्ष्य में तकरीबन ठीक फिट बैठते हैं - मंगल सिंह ( तीन साल के विधायकों ) के लिये मतदान 3 तारीख को यानि मंगल को हुआ , और इनके मतदान का परिणाम भी 10 तारीख यानि मंगल को ही आयेगा । जो निबटेंगें वे कहेंगें - फिर मिलेंगें - जो जीतेंगें वे कहेंगें कि मंगल सिंह मंगल को पैदा हुआ और .....  खैर जो भी हो कल पता चल जायेगा , जिसकी सरकार बननी है या बचनी है , उसका फैसला भी दोपहर 12:30 बजे से 1 बजे के बीच हो जायेगा , उसके बाद तो सब औपचारिकता मात्र रह जायेगी , पहले स्पष्ट बहुमत के रूझाान करीब 11 बजे तक मिलने लगेंगें तो वहीं यह भी तय हो जायेगा कि सन 2023 के विधानसभा चुनावों में क्या होगा और किसकी सरकार फिर अगले 15 - 20 साल मध्यप्रदेश में रहनी है ।  हांलांकि दो बातें एकदम साफ और स्पष्ट हैं पहली ये कि मध्यप्रदेश में अभी तो वही सरकार रहनी है जो वर्तमान में  है और उनके लिये केवल 8 सीट मात्र निकालना बहुत ही आसान और पक्का काम है । इसलिये फिलहाल कांग्रेस को तो फील्डिंग ही करनी है और यही हालात रहे तो सन 2023 के चुनाव के बाद 15 / 20 साल भी आगे भी फील्डिंग की तैयारी रखे  ।  कल के परिणाम आने के बाद भी अगर कांग्रेस और कांगेसी नहीं समझे तो , साक्षात परमात्मा और विरंचि बृह्मा भी नहीं इन्हें समझा सकते ।  विचार करने को पूरे तीन साल कांग्रेस को और कांग्रेसियों को मिलेंगें , और यह मंथन करना चाहिये कि 15 महीने में कहां कहां चूके , कहां कहां क्या क्या गलतियां कीं , और उनका मार्जन और परिमार्जन क्या है ।  हर गली मंजिल की ओर जाये , यह जरूरी नहीं होता , राह चलते चलते कभी पता चलता है कि पूरी गली पार करने के बाद , पता चला कि आगे गली बंद है ।  खैर इतने पर ही सतोष मुनासिब होगा कि नये तीन साला विधायक केवल तनखा ले पायेंगें , इन्हें पेंशन नहीं मिलेगी , उसके लिये पूरे पांच साल विधायक रहना जरूरी है ।  खैर इतना साफ है कि अगले तीन साल वर्तमान सरकार सही सही और कायदे के फायदे के काम करेगी , अपनी इमेज बनायेगी और अपने काम के दम पर वोट मांगेंगी । इसलिये अब यहां से आगे कांग्रेस की डगर और राह मुश्किल ही मुश्किल है । अवसरवादी  कांग्रेसी चोट खायेंगें , यह मुकम्मल पुख्ता है, बहुत से उपेक्षित और पुख्ता कांग्रेसी जल्द ही नई वर्तमान सरकार के किसी न किसी रूप में हिस्सा होंगें । और सन 2023 में कांग्रेस की बुनियादें यानि ग्रासरूट और पिलर्स यानि स्तंभ पूरी तरह से खत्म हो चुके होंगें ।  कांग्रेस के हाईकमान लेवल ने इस पूरे चुनाव से खुद को दूर रखा है और सोनिया गांधी , राहुल गांधी , प्रियंका गांधी ने प्रत्याशीयों की नहली सूची जारी होने के बाद से म प्र चुनावों से खुद को पूरी तरह से दूर भी कर लिया और म प्र चुनावों में स्टार प्रचारक सूची में नाम होने और दौरा कार्यक्रम घोषित कर देने क बावजूद म प्र में कदम नहीं रखा और न सोशल मीडिया वगैरह या अन्य किसी प्रकार से कोई शिरकत ही की । इससे उनका स्पष्ट संदेश म प्र कांग्रेस को समझ लेना चाहिये । अब भी नहीं समझे तो , समय रहते समझ में आ जायेगा ।  कांग्रस हाई कमान की  यह चतुराई ही रही वरना वही बात हो जाती .... वे जहां प्रचार करने जाते या गये वहीं वहीं कांग्रेेस ....  खैर ...... कांग्रेस में दिल्ली स्तर और हाई कमान स्तर पर संगठन में मध्यप्रदेश में बहुत बड़े फेरबदल की रूपरेखा खींची जा रही है ..... हमारी शुभकामनायें सभी प्रत्याशीयों को ...... 
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वीडियो  काल अटेंड करने से पहले हो जायें सावधान नरेन्द्र सिंह तोमर , एडवोकेट 80 फीसदी आपराधिक  वारदातों में की जाती है रैकी और फिर हत्या से लेकर सायबर क्राइम और चोरीयों के लिये इस्तेमाल किये जाते हैं , मोबाइलों की लोकेशन और आपकी लोकेशन और पृष्ठभूमि से लेकर हालातों और हालत की ट्रेसिंग ....  जहां इस समय सायबर क्राइम का जोर बढ़ता जा रहा है , वहीं अभी भारत के पुलिस विभाग में न तो सायबर क्राइम विशेषज्ञ उपलब्ध हैं और न तकनीकी जानकारी के विशेषज्ञ , केवल एथिकल हैकिंग के कोर्स मात्र करे चंद लोगों के जरिये ही पुलिस विभाग अपना काम चला रहा है जबकि सायबर क्राइम एक बहुत बड़ी व्यापक विधा है और इसका दायरा व क्षेत्र तकरीबन आम आदमी के सभी निजी जीवन तक और प्रायवेसी तक पहुचता है । 98 फीसदी आम आदमी को पता ही नहीं चलता और पता ही नहीं हो पाता कि उसके छोटे से मोबाइल फोन या उसके आई फोन या टेबलेट या डेस्कटाप के जरिये न तो उसका कुछ भी निजी रहा है और न कोई भी जानकारी निजी रही है । मसलन कई बरस पहले जब स्मार्ट फोन दुर्लभ थे और 10 हजार लोगों में से किसी एक पर स्मार्ट फोन होता था । 3 जी नेटवर्क तक आदमी कुछ हद तक महफूज था । भारत में 4 जी नेटवर्क के साथ तमाम दुष्टतायें अपने आप ही साथ आ गईं । लेकिन 4 जी के साथ , सावधानियां और सुरक्षायें कंपनीयां उपलब्ध नहीं करा पाईं । या धन के लालच और प्रतिस्पर्धा से भयभीत होकर बाजार कैप्चर हाथ से निकल जाने के डर या लोभ लालच से जानबूझ कर नहीं कराई गईं । अब तो 5 जी का टर्निंग टाइम है , भारत में 5 जी की लांचिंग और टेस्टिंग 2018 में की गई थी और सितंबर 2018 तक इसे आम लोगों के लिये लांच करने की घोषणा की गई थी , लेकिन किसी वजह से इसे पहले जनवरी 2019 तक फिर सितंबर 2019 तक बढ़ाया गया , सन 2019 में 5 जी की स्पेक्ट्रम की नीलामी की गई , इसे दो कंपनीयों ने खरीदा और बाद में एक अन्य कंपनी ने भी खरीदा । कंपनीयों ने सन 2019 में इसे जनवरी 2020 में चालू करने की घोषणा की , लेकिन कंपनीयां स्पेक्ट्रम खरीदने के बावजूद इसे अक्टूबर 2020 बीतने तक भारत में शुरू नहीं कर पाईं । जबकि 5 जी फोन बाजार में जनवरी 2020 के पहले ही सन 2019 में बाजार में आ गये । खैर नेटवर्क में कोई सी भी हो , मुख्य खतरा जहां से शुरू होता है उसमें पांच चीजें प्रमुख हैं 1. डिवाइस ( कम्प्यूटर , मोबाइल , लैपटाप , आई फोन आदि , डिवाइस की सम्यक परिभाषा आई टी एक्ट 2000 में देखें , यही परिभाषा व्यापक है , जिसमें किसी कम्यूनिकेशन डिवाइस को शामिल किया गया है चाहे वह कोई भी उपकरण हो और जिसका इस्तेमाल किसी भी संचार में या किसी भी माध्यम में आता हो जो किसी आवाज , इमेज , फोटो, वीडियो , या टेक्स्ट – लेख को कम्यूनिकेट करती हैं और संगृहीत की जाती हैं तथा एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरणीय और हस्तांतरणीय हैं ) चाहे वह फिजिकल हो , आप्टीकल हो या वायरलेस हो या इन्फ्रा रेड टेक्नालाजिकल कोई भी ( इन्फ्रारेड को सामान्य भाषा में आई आर कहा जाता है ) , कोई मॉडम या रूटर , कैमरा , ड्रॉन आदि सभी ( जिन के लिये गृह मंत्रालय द्वारा लायसेंस जारी किया जाता है वे मालवाहक ड्रोन , बगैर लायसेंस लिये कोई भी शख्स या कंपनी या सर्विस प्रोवाइडर कैसा भी कोई ड्रान कहीं भी नहीं , कभी भी नहीं उड़ा सकता या चला सकता है ) इस संबंध में गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा विस्तृत निर्देश एवं नियमावली व अनुज्ञप्ति विधान जारी किये गये हैं , ग्वालियर टाइम्स इन्हें सम्यक अवसर पर प्रकाशित करेगी । डिवाइसों की सेटिंग प्रमुख विषय वस्तु है , जिसमें प्रायवेसी और सिक्योरिटी सेटिंग्स ( निजता , गोपीयता और सुरक्षा सेटिंग ) प्रमुख हैं इन्हें सोच समझ कर अपनी आवश्यकता नुसार बेहद सख्त मोड पर सेट करके रखना चाहिये , यदि वायरलेस या आई आर के जरिये इन सेटिंगों से कोई छेड़छाड़ करता है या पासवर्ड चुराता है या किसी या सारी सेटिंग्स अल्टर करता है या किसी डिवाइस को फेब्रिकेट करता है , जाली डिवाइस या सिम क्लोन करके बनाता या इस्तेमाल करता है तो यह सब सायबर क्राइम् के तहत आता है और आई पी सी की तमाम धाराओं सहित , आई टी एक्ट 2000 के तहत परिभाषित अपराध हैं और इनकी सजा आजीवन कारावास तक निर्घारित है । सिम – दूसरे पहलू में सिम कार्ड चाहे वह फिजिकल सिम हो या इलेक्ट्रानिक या ई सिम हो या किसी सिम से कनेक्ट होने वाला आई आर या वायरलेस नेटवर्क हो जिसमें डब्ल्यू पी एस , वाई फाई , वी पी एन , डायरेक्ट वायरलेस / डब्ल्यू पी एस कनेक्टिविटी आदि शामिल हैं । किसी ऐसी कंपनी की सिम लें जिसमें कंपनी किसी भी फ्री योजना में या प्रथम रीचार्ज ( एफ आर सी ) में लाइव , फ्री टी वी पैक , फ्री सबस्क्रिप्शन ( डाटा और कालिंग के अलावा ) उपलब्ध न कराती हो , सिमों को बेचने की यही योजनायें लोभ लालच में आदमी के साथ होने वाली वारदातों की मुख्य वजह बनती है और अपराधी जो कि अधिकतर सिम विक्रेताओं से जुड़े रहते हैं , ऐसी सिमों / नई सिमों ( अपराधीयों की भाषा में इन्हें कमजोर सिम या सिमों की कमजोरी कहा पुकारा जाता है और ऐसी सिमों को और सिम धारक को अपना टारगेट बनाया जाता है , सिम सुरक्षा के लिये सबसे अव्वल सिम कार्ड में लाक डाल कर रखना चाहिये । सिम लाक खोलने के लिये अपराधी को लाक पासवर्ड डालना पड़ेगा , और पी यू के कोड जानने की जुगत लगानी होगी । अगर आपका पी यू के कोड अपराधी किसी तरह से जान लेते हैं तो आप बजाय सिम बदलने के लिये अपना सिम पोर्ट करा दें , इसे एम एन पी कहा जाता है , कंपनी बदलते ही आपका पी यू के कोड अपने आप बदल जायेगा । अपराधी सामान्यत: ( 90 प्रतिशत सिम संबंधी क्राइमों में ) आपके सिम लाक कोड, पी यूके कोड , स्थानीय सिम विक्रेताओं या लोकल सिम डीलर से आसानी से हासिल कर लेते हैं , उसके बाद आपकी सिम को लास एंड डेमेज करने का खेल शुरू होता है और आपके ओटीपी , पासवर्ड , वीडियो कालिंग , डिवाइसों पर कम्यूनिकेशन , कालिंग , सिंक्रोनाइजिंग , क्लाउड सिंक्रोनाइजेशन आदि आपके उस नंबर की सारी की सारी अपराधी हासिल कर लेते हैं । कैसे किया जाता है यह इसी आलेख समाचार में आगे पढ़ें । इंटरनेट सर्फिंग / ब्राउजिंग / हैबिटस / क्लोनिंग / सिंक्रोनाइजेशन/ ट्राझन्स / की लागर्स / मालवेयर्स तथा वायरस आदि सीक्रेट/ हिडन डिवाइसेज और एप्लीकेशन्स / साफ्टवेयर्स आदि जैसे मोबाइलों में हिडन कैमरा एप्लीकेशन इंस्टाल करना सभी प्रकार की ट्रेसिंग डिवाइसेज / सभी प्रकार की ट्रेसिंग एप्लीकेशन्स / साफ्टवेयर्स आदि चाहे वे आफलाइन काम करतीं हों / चाहे वे आनलाइन काम करतीं हों या चाहे वे बैकग्राउंड में काम करतीं हों ( सभी आई पी सी और आई टी एक्ट में परिभाषित अपराध हैं   शेष अगले अंक में ........  कुछ केसेज सायबर क्राइम मुरैना जिला तथा कैसे बनाया जाता है आपको शिकार और कैसे आपकी जान माल खतरे में है , कैसे बचें आप इन अपराधीयों से , कैसे करते हैं अपराधी आई टी और सायबर का इस्तेमाल करते हैं अपराधी , पुलिस कहां और कैसे असफल होती है , कैसे पुलिस में ही घुसे बैठे हैं 90 फीसदी सायबर अपराधी .... नरेन्द्र सिंह तोमर , एडवोकेट ( आई टी एवं सायबर क्राइम स्पेशलिस्ट   , म. प्र उच्च न्यायालय , खंड पीठ . ग्वालियर हाई कोर्ट , जिला एवं सत्र न्यायालय मुरैना

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                                          कल्लन के माध्यम से वैश्य वोटरों को साधने की कांग्रेस कि कवायद श्रीगोपाल गुप्ता प्रदेश में विधानसभा के हो रहे 28 उप चुनाव के बीच कांग्रेस ने चम्बल मुख्यालय मुरैना जिले की पांचों सीटों पर लाखों वैश्य वर्ग के मददाताओं को साधने के लिए वैश्य समाज के चर्चित चेहरे प्रसिद्ध समाज सेवक और औधोगपति विष्णु अग्रवाल "कल्लन" को कार्यकारी जिला अध्यक्ष घोषित किया है! उल्लेखनीय है कि जिला व्यापार महासंघ के अध्यक्ष विष्णु अग्रवाल पूर्व विधायक व ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक मुन्नालाल अग्रवाल के समधी हैं, जिनकी भूमिका गत विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस के लिए काफी महत्वपूर्ण और सकारात्मक रही! इस चुनाव में जहां कल्लन ग्वालियर पूर्व से कांग्रेस मुन्नालाल अग्रवाल को जिताने के लिए चुनाव के दौरान एक महिने ग्वालियर डटे रहे, वहीं मुरैना जिले की सभी छह सीटों पर धूंआदार कांग्रेस प्रत्याशियों को जिताने के लिए अपने व्यापारिक संगठन जिला व्यापार मण्डल के पदाधिकारी व सदस्यों के साथ सक्रिय रहे! उनकी पार्टी के प्रति सक्रिय भूमिका और क्षमताओं को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस के महासचिव व प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के अत्यंत नजदीकी गोंविंद अग्रवाल की अनुशंसा पर स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री कभलनाथ ने उनका मनोयन किया है, उनके मनोयन की घोषणा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व प्रदेश प्रभारी मुकुल वासनिक ने की! कल्लन को कार्यकारी जिला अध्यक्ष बनाने के पीछे कांग्रेस की स्पष्ट मंशा है कि परम्परागत रुप से भाजपा का वोट बैंक बन चुके वैश्य मतदाताओं में पैठ कर इन उप चुनाव में भाजपा को झटका दिया जाये! परिस्थिति बस इन उप चुनाव में वैश्य मतदाता विगत कई चुनाव के बिपरीत भारतीय जनता पार्टी से अच्छा-खासा नाराज दिखाई दे रहा है! उसकी नाराजी की दो वजह हैं पहली वही की इन चुनाव में जिले में किसी वैश्य को टिकट नहीं देना और दूसरा वह मानता है कि कमलनाथ की कांग्रेस की सरकार को गिराकर भाजपा ने लोकतंत्र का माखौल उड़ाया है! वैसे भी मुरैना से रामप्रकाश राजोरिया ने बहुजन समाज पार्टी से नामाकंन दाखिल कर भाजपा के वैश्य मतदाताओं के गढ़ में धमाकेदार एंट्री कर ली है! भाजपा रामप्रकाश राजोरिया की काट में लगी ही थी कि कांग्रेस ने कल्लन को जिला कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर भाजपा के लिए परेशानियों में और इजाफा कर दिया है! इधर कल्लन को स्वयं कमलनाथ ने बड़ा महत्व देते हुये जिले के दौरे पर अपने साथ रखा, उन्होने दिमनी सहित कई विधानसभा क्षेत्रों में कल्लन को मंच पर अपने साथ बिठाया! बहरहाल विष्णु अग्रवाल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाये जाने और कमलनाथ द्वारा उन्हें विशेष सम्मान दिये जाने से वैश्य समाज काफी खुश और अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा है!इसके लिए अखिल भारतीय वैश्य ऐकता परिषद की प्रदेश इकाई ने कमलनाथ व गोंविंद अग्रवाल के प्रति धन्यवाद देते हुये कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने का वैश्य बंधूओं से आव्हान किया है! बहरहाल देखना दिलचस्प होगा कि कल्लन को कार्यकारी जिला अध्यक्ष बनाने पर भाजपा का परंपरागत मतदाता रहा वैश्य समाज कांग्रेस को कितना सहयोग देता है, क्योंकि मुरैना, अबांह और जोरा में वैश्य मतदाता निर्णायक माना जाता है!
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अखिल भारतीय माथुर वैश्य महासभा के 133 वें स्थापना दिवस, महासभा जयंती पर पूरे विश्व में निवास कर रहे हैं माथुर वैश्य बंधुओं को बहुत-बहुत शुभकामनाएं ।    डा' अमरनाथ कौशल मिलजुल कर 133वीं महासभा जयंती मनायें। संगठन की शक्ति को समझें और समझायें। समाज उत्थान में हो सबकी भागीदारी । अभी चुनौतियां बहुत हैं करें और तैयारी । ईंट-ईंट से जुड़कर ही विशाल महल बन पाता है। संकल्पों की पुण्यवेदी पर काम पूर्ण हो जाता है। युवा शक्ति में ऊर्जा, साहस मिलकर उसे बढ़ाएं । उन के लिए मार्ग खोलें, पथ प्रर्दशक बन जायें। आज सक्रिय हर क्षेत्र में स्व समाज की नारी । उसको भी सम्मान मिले नहीं वह अब लाचारी । मिली सफलताओं पर ना हो हम अभिमानी । भूलें ना पूर्वजों को ,बने उनके गुण गानी । समाज के हर वर्ग तक, बात अपनी पहुंचाएं । जो रह गए पीछे उनको उन्नति शिखर चढ़ाएं । समाज उत्थान में हो सबकी भागीदारी । अभी चुनौतियां बहुत है करें और तैयारी । रचनाकाार:- अखिल भारतीय माथुर वैश्य महासभा के  कार्यसमिति के  नया भोपाल से सदस्य हैं! 
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एक बार एक व्यक्ति की उसके बचपन के टीचर से मुलाकात होती है । वह उनके चरण स्पर्श कर अपना परिचय देता है।वे बड़े प्यार से पुछती है, 'अरे वाह, आप मेरे विद्यार्थी रहे है, अभी क्या करते हो, क्या बन गए हो ?' ' मैं भी एक टीचर बन गया हूं ' वह व्यक्ति बोला,' और इसकी प्रेरणा मुझे आपसे ही मिली थी जब में 7 वर्ष का था।' उस टीचर को बड़ा आश्चर्य हुआ, और वे बोली कि,' मुझे तो आपकी शक्ल भी याद नही आ रही है, उस उम्र में मुझसे कैसी प्रेरणा मिली थी ??' वो व्यक्ति कहने लगा कि .... 'यदि आपको याद हो, जब में चौथी क्लास में पढ़ता था, तब एक दिन सुबह सुबह मेरे सहपाठी ने उस दिन उसकी महंगी घड़ी चोरी होने की आपसे शिकायत की थी। आपने क्लास का दरवाज़ा बन्द करवाया और सभी बच्चो को क्लास में पीछे एक साथ लाइन में खड़ा होने को कहा था। फिर आपने सभी बच्चों की जेबें टटोली थी। मेरे जेब से आपको घड़ी मिल गई थी जो मैंने चुराई थी। पर चूंकि आपने सभी बच्चों को अपनी आंखें बंद रखने को कहा था तो किसी को पता नहीं चला कि घड़ी मैंने चुराई थी।टीचर उस दिन आपने मुझे लज्जा व शर्म से बचा लिया था। और इस घटना के बाद कभी भी आपने अपने व्यवहार से मुझे यह नही लगने दिया कि मैंने एक गलत कार्य किया था। आपने बगैर कुछ कहे मुझे क्षमा भी कर दिया और दूसरे बच्चे मुझे चोर कहते इससे भी बचा लिया था।' ये सुनकर टीचर बोली, ' मुझे भी नही पता था बेटा कि वो घड़ी किसने चुराई थी।' वो व्यक्ति बोला,'नहीं टीचर, ये कैसे संभव है ? आपने स्वयं अपने हाथों से चोरी की गई घड़ी मेरे जेब से निकाली थी।' टीचर बोली.....'बेटा मैं जब सबके पॉकेट चेक कर रही थी, उस समय मैने कहा था कि सब अपनी आंखे बंद रखेंगे , और वही मैंने भी किया, मैंने स्वयं भी अपनी आंखें बंद रखी थी।' अनुकरणीय आदर्श शिक्षक की प्रेरणादायक सोच । किसी को उसकी ऐसी शर्मनाक परिस्थिति से बचाने का इससे अच्छा उदाहरण और क्या हो सकता है ? अध्यापक की इस प्रेरणा से पढ़कर अध्यापक बना वह बच्चा आधा संस्कार लेकर यदि जीवन मे इतना बदलाव कर सकता है तो विचार कीजिये कि अनुकरणीय संदेश ( आप स्वयं भी अपनी आंख बंद कर ले जिससे तुलनात्मक/आलोचनात्मक सोच आपमें भी न आये ) का अनुकरण कर के जीवन मे कितना सृजनात्मक बदलाव किया जा सकता था। आइये प्रण करें की यदि हमें किसी की कमजोरी मालूम भी पड़ जाए तो उसका दोहन करना तो दूर, उस व्यक्ति को ये आभास भी ना होने देना चाहिये कि आपको इसकीं जानकारी भी है। स्वयं में व समाज में बदलाव लाने के प्रयास जारी रखें ।😢 आपका दिमाग एक शक्तिशाली चीज है। जब आप इसे सकारात्मक अच्छे विचारों से भर देंगे, तो आपका जीवन बदलना शुरू हो जाएगा।एक पहल बुराइयों को मिटाने की . ( साभार'- प्रेरणादायक कहांनिया )
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श्रीमंत से 10 नम्बरी बने ज्योतिरादित्य सिंधिया श्रीगोपाल गुप्ता दो दिन पूर्व एक उप चुनावी सभा को कांग्रेस तज कर जनता की भलाई के उद्देश्य को लेकर भारतीय जनता पार्टी की शरण में आये राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संबोधित करते हुये बहुत ही मजेदार बयान दिया! कांग्रेस की दुखती हुई नस पर अंगूली जमाते हुये उन्होने भाजपा की पुरानी मांग को दोहराते हुये पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह को ललकारते हुये कहा कि बड़े भाई जो उप चुनाव में पर्दे के पीछे छुप गए हैं, वे सामने आऐं और कांग्रेस के लिए वोट मांगे! सिंधिया और भाजपा दोनों ही बहुत अच्छी तरह से जानते हैं कि सन् 2018 के चुनाव में या इसके पूर्व के भी कई चुनाव में और अब भी कांग्रेस के पास दिग्गी राजा के चुनाव प्रचार न करने कोई जबाव नहीं हैं,हालांकि स्वयं दिग्विजय सिंह कह चुके हैं कि उनके प्रचार करने से कांग्रेस के वोट कट जाते हैं! फिर भी भाजपा दिग्विजय सिंह को चुनाव उतर कर प्रचार करने की चुनौती देती रहती है लिहाजा अब सिंधिया ने भी यही घिस-पिट गए बयान को दोहरा दिया! मगर कांग्रेस हमैशा तरह सिंधिया के बयान पर चुप्पी साध गई! मगर इस बयान के 48 घण्टे के अन्दर भाजपा ने कांग्रेस को सिंधिया को लेकर एक मुद्दा पकड़ा दिया! बस फिर क्या था पूर्व मंत्री जीतू पटवारी से लेकर प्रदेश कांग्रेस के विभिन्न नेता सक्रिय हो गये और भाजपा व सिंधिया को घेरने लगे हैं! दरअसल भाजपा ने मध्य प्रदेश में हो रहे 28 विधानसभा उप चुनाव को लेकर जो अपने चालीस स्टार प्रचारकों की सूची बनाई है उसमें कांग्रेस में रहते श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया को 10 नम्बर जगह दी गई है,जो उनके कद और लोकप्रियता को देखते हुए वाकई हैरान कर देने और उनके समर्थकों के लिए एक झटका ही है! इसको लेकर कांग्रेस मुखर है और वो सिंधिया पर व्यंग्य बाणों की बौछार करने में पीछे नहीं रहना चाहती! यद्यपि यदि सूत्रों पर भरोषा किया जाये तो भारतीय जनता पार्टी ने उप चुनाव को लेकर अभी तक जितने भी सर्वे कराये हैं उसमें सिंधिया जी कोई विशेष कारनामा करने की स्थिति में नहीं हैं! यदि अन्य क्षेत्रों को छोड़ दिया जाए तो सिंधिया खुद कथित अपने गढ़ ग्वालियर-चंबल संभाग की 16 सीटों पर भी भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में ज्यादा सफल होते दिखाई नहीं दे रहे हैं! इसका मूल्याकंन करके ही अब चंबल-ग्वालियर की 16 सीटों को अकेले सिंधिया के भरोषे न छोड़कर खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने मोर्चा संभाल लिया है और पूरी ताकत झोंक दी है! दरअसल सिंधिया व उनके कांग्रेसी विधायकों की पार्टी में मौजुदगी को भाजपा के ही वफादार और पुराने कार्यकर्ता व समर्थक पचा नहीं पा रहे हैं! यदि चाय,पान और हजामत वालों की दुकानों पर चर्चा चल रही है चर्चाओं पर ध्यान दिया जाये तो उससे भी सिंधिया समर्थक व भाजपा का अपना कैडर बेस कार्यकर्ता काफी निराश और व्यथीत है! कभी कांग्रेस में रहते हुए आम जनता की नजर में पोस्टर वाॅय और ग्लैमरस के तौर पर धाकड़ नेता की हैसियत रखने वाले सिंधिया की छबि को भिण्ड में मेहगांव से कांग्रेस प्रत्याशी कटारे के लम्बे व विशाल नामाकंन जुलूस के कारण ढाई घण्टे सड़क पर जाम में फंस जाने की खबर से बड़ा धक्का लगा है! फिलहाल ये देखना काफी दिलचस्प होगा कि कांग्रेस में रहते श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया से भाजपा के 10 नम्बरी बने सिंधिया उप चुनाव में अपने कितने पूर्व विधायकों को विधायक बनाने में सफल होते हैं?ये भी उनके 10 नम्बर की तरह 10 नवंबर को ही तय होगा! !      
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संस्थाओं / स्कूलों /स्वयं सेवी संस्थाओं / कपनीयों/ समितियों पंजीकृत किसी भी समिति के विरूद्ध अपराध पंजीकृत करने, विवेचना और मुकदमा चलाने की प्रक्रिया धारा 305 ( Cr.P.C. 1860 तथा 1973 ) (2010) लेखक- नरेन्द्र सिंह तोमर एडवोकेट , म प्र जब किसी भी पंजीकृत संस्था चाहे वह कोई कंपनी हो या समिति हो या निकाय हो या एन जी ओ हो या कोई चैरिटेबल ट्रस्ट हो या कोई स्कूल या कालेज हो या अन्य , अगर उनके खिलाफ कोई अपराध पंजीबद्ध किया जाता है , यानि उस पंजीकृत संस्था के विरूद्ध तो उसके किसी भी पदाधिकारी या अन्य को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता , यह प्रोटेक्शन सी आर पी सी की धारा 305 में पंजीकृत सभी संस्थाओं और निकायों को दिया गया है और न उन व्यक्तियों / पदाधिकारीयों के नाम से मुकदमा चलाया जा सकता है । इस धारा के प्रोटेक्शन के लिये संस्थाओं को एक बेहतरीन एडवोकेट से संपर्क करना चाहिये , वे ही इस धारा का मुकम्मल संरक्षण संस्थाओं को और उनके पदाधिकारीयों को दिला सकेंगें । सी आर पी सी की धारा में संस्था का सक्षम प्राधिकारी , पुलिस द्वारा अपराध दर्ज करने से पूर्व की जाने वाली जांच में पुलिस को एक पत्र नियुक्ति संबंधी सौंपेगा , जिसमें वह संस्था के वैध प्रतिनिधि (संस्था का लीगल एडवायजर या कोई एडवोकेट ) का नाम लिखते हुये उसे संबंधित प्रकरण मे अपना प्रतिनिधि संस्था की ओर से नियुक्त करने संबंधी पत्र पुलिस को देगा और अदालत में व पुलिस में संस्था की ओर से प्रतिनिधित्व करने का उल्लेख करेगा । ऐसी नियुक्ति घोषणा पर केवल हस्ताक्षर ही पर्याप्त होंगे , इस पर संस्था की कामन सील अनिवार्य नहीं होगी और जरूरी नहीं होगी । उल्लेखनीय है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत पंजीकृत संस्थाओं को राज्य का दर्जा प्राप्त है , जिसके अपने खुद के मेमोरेंडम व आर्टीकल आफ एसोसियेशन होते हैं जिन्हें ज्ञापन विधान कहा जाता है , उसका अपना खुद का संविधान और आंतरिक नियम व पारिनियम होते हैं, वह आंतरिक परिपत्र जारी करने हेतु प्राधिकृत होते हैं , इसलिये जिस तरह किसी राज्य या स्टेट के विरूद्ध कार्यवाही की जाती है और मुकदमे चलाये जाते है, वही प्रक्रिया पंजीकृत संस्थाओं के मामले मे अपनाई जाती है । सुप्रीम कोर्ट ने अनेक मामलों में अनच्छेद 12 की व्याख्या की है , और पंजीकृत संस्थाओं को राज्य का दर्जा प्राप्त उल्लेख किया है और पुलिस को ऐसी कोई कार्यवाही करने से रोक दिया है जो अनुच्छेद 12 के या धारा 305 के प्रावधानों से परे या विरूद्ध है या अतिक्रामित करती है विसंगत है , सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी सभी पुलिस कार्यवाहीयों को निरस्त कर दिया और पुलिस को दंडित किया जिनमें अनुच्छेद 12 और धारा 305 का पालन किये बगैर संस्थाओं के विरूद्ध पुलिस द्वारा कार्यवाही की गयी, ऐसी सभी कार्यवाहीयां गैर कानूनी और प्रताड़ित की जाने वाली कार्यवाहीयां मानीं गयीं । केवल वह संस्था ही अपने किसी पदाधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ अपराध दर्ज करा सकती है , अन्य कोई भी व्यक्ति या पुलिस सीधे किसी पदाधिकारी या कर्मचारी के विरूद्ध मामला दर्ज और अपराध पंजिबद्ध कर गिरफ्तार नहीं कर सकती । धारा 305 के प्रोटेक्शन में यह भी है कि यदि संस्था के नाम से केस दर्ज किया है तो केवल संस्था के नेम टायटल तक रहना होगा , किसी भी दोषी व्यक्ति को केवल संस्था अपनी आंतरिक जांच के आधार पर ही पुलिस या अदालत को सौंप सकती है । पुलिस संस्था के अभिलेख न तो जप्त कर सकती है और न देख सकती है , संस्था जितने अधिकार देना चाहेगी केवल उतनी जानकारी ही पुलिस संस्था से ले सकती है । संस्था जो और जितना आवश्यक समझेगी , केवल उतनी जानकारी और प्रमाणित प्रतियां जांच एजेंसी या विवेचना कर रहे पुलिस अधिकारी को देगी , वह बाध्य कर कुछ भी प्राप्त नहीं करेगी । अन्यथा यह , सी आर पी सी की धारा 305 , संविधान के अनुच्छेद 12 और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये आदेशों के विरूद्ध और अवमानना कारक होगा । नरेन्द्र सिह तोमर "आनंद" एडवोकेट

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