निष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकित
 

नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनंद''


अहमद पटेल के निधन से जहां कांग्रेस को एक अहम व खासी क्षति हुई है तो वहीं म प्र. कांग्रेस में उपचुनाव का उत्तर कांड शुरू हो चुका है , नेताओं में जंग छिड़ चुकी है , अस्तित्व और अस्मिता के साथ वर्चस्व की लड़ाई है , जिलाध्यक्ष की हैसियत और ताकत व औकात बताने में जिलाध्यक्ष जुटे हैं , बरसों बरस से अपराजेय और कांग्रेस की जड़ों में दशकों से अपना खून सींच रहे और दिग्विजय सिंह सरकार से लेकर कमलनाथ सरकार तक में मंत्री रहे , डॉ गोविन्द सिंह को भिंड के जिलाध्यक्ष जय श्रीराम बघेल ने कांग्रेस से निकाले जाने की मांग का प्रस्ताव पारित कर दिया है तो वही बाकी जिला कांग्रेस कमेटी भिंड ने जिला उपाध्यक्ष से लेकर कार्यकर्ताओं तक सभी ने जिलाध्यक्ष जय श्रीराम बघेल के बयान का खंडन कर दिया है और कहा है कि मेहगांव में कांग्रेस प्रत्याशी हेमंत कटारे की हार की समीक्षा अवश्य की गयी है और वहां न तो कोई भी प्रस्ताव पारित किया गया और न डॉ गोविंद सिंह की भूमिका पर कोई चर्चा वहां हुई ।
कांग्रेस की सियासी रंगत म प्र. में नजर आने लगी है ।
जय श्रीराम बघेल उस समय के कांग्रेस अध्यक्ष हैं जब ग्वालियर चम्बल में कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्तियां केवल और केवल मात्र सिंधिया जी के चमचों की ही हुआ करतीं थीं । बेशक इसी को यूं कहा जा सकता है कि कांग्रेस में सिंधिया जी की बी टीम सदस्य हैं जय श्री राम बघेल ।
बेशक ही हमें व्यक्तिगत काफी जिल्लत और परेशानी उठानी पड़ी थी कांग्रेस ( कमलनाथ) सरकार के समूचे कार्यकाल में , और शायद हमसे ज्यादा दोयम दर्जे का बर्ताव और व्यवहार इस कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में किसी और से हुआ भी नहीं होगा तथा हमारे पूरे जीवन काल में ऐसे बुरे दिन हमने कभी देखे भी नहीं ।
बेशक हम कमलनाथ सरकार के खिलाफ ही रहे और उन दिनों के अनुभव के चलते रहेंगें भी । मगर सवाल यह है कि अगर हम यह मान भी लें कि उस समय सिंधिया की वजह से हमारे साथ गलत हो रहा था और सिंधिया हावी थे , तो अब क्या बात हुई कि अब जब सिंधिया कांग्रेस में नहीं हैं और फिर भी कांग्रेस के टिकिट गलत बंट गये , बिल्कुल उसी तरह जैसे पहले बंटते थे । अब कौन सिंधिया है कांग्रेस में , अब कौन टिकट बेच गया कांग्रेस के ।
अब कैसे विश्वास किया जाये कि कांग्रेस ठीक और दुरूस्त हो गयी है या हो रही है , जब तवा गरम देख कर अपनी अपनी रोटी सेंकने की कोशिश हो रही है ।
कांग्रेस में ठाकुरों को तो बुरी तरह से ग्वालियर चम्बल में ठिकाने पहले से ही लगा दिया गया है । और अब गोविंद सिंह को भी पटकने की कोशिश की जा रही है जो कि इस समय चम्बल और ग्वालियर में कांग्रेस के एकमात्र प्रभावी ठाकुर नेता , हालांकि डॉ गोविंद सिंह ने कहा है कि कांग्रेस जिलाध्यक्ष जय श्रीराम बघेल बहुत बड़े नेता हैं , वे कुछ भी कर सकते हैं , वे कांग्रेस से निकाल भी सकते हैं । मैं एक छोटा मोटा कांग्रेसी हूं , वे मुझे कुछ भी सजा सुना सकते हैं ।
बचे हैं , तो इसे क्या कांग्रेस के ताबूत में अंतिम कील ठोकना माना जाये वह भी उस सूरत में जबकि सब जानते हैं , ग्वालियर चम्बल राजपूताना बेल्ट है और बगैर राजपूतों के यहां किसी भी राजनैतिक दल की दाल नहीं गल सकती ।
यही एक वजह है कि राजपूतों का झुकाव अपने आप ही भाजपा के केन्द्रीय मंत्री और मुरैना सांसद नरेन्द्र सिंह तोमर की ओर हो गया और कभी कांग्रेस का गढ़ रहा ( स्व अर्जुन सिंह और दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में ) आज वही ग्वालियर चम्बल भाजपा का गढ़ बन गया ...... सोचो प्यारे जरा दिल से और दिमाग से , सोचोगे तो सब समझ आ जायेगा , वरना मुर्दो को चोट नहीं लगा करती