निष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकित
 
लेखक - जितेन्द्र विक्रम सिंह तोमर ( 52 से ) 
 
"उठो देव-बैठो देव" से लेकर 'कान पकड़ उठा बैठक 'करने की स्तिथि तक आने को "सहालग" कहते हे।  अर्थात 'देवोत्थानी एकादशी से देवशयनी एकादशी मध्य का समय ...! 
पता ही नहीं चलता कब कोनसे फूफा ओसारे की टूटी खाट पर पड़े पड़े राजपाल यादव से अर्जुन रामपाल बनने की कोशिश में जॉनी लीवर बने नजर आ जाए !
 
कुवारों-कुंवारियों के सावन के सोमबार से नवरात्रि तक किये अनगिनत उपवासो का फल कब प्रतिफल बन 'फलदान' का समय ले आये!भोजाइया दवे होंठो से ननद-देवरो को टटोलने लगती हे की 'द्वार रुकाई-काजल लगाई जेसी नेग भरी रश्मो में क्या मांग रखेंगी !
अब आधुनिक समय हे जियो के साथ वीडियो व्हाट्सऐप वीडियो पर विवाह से पूर्व ही भविष्य के युगलों में 33 psi दबाब से ट्युव ब्रस्ट होने तक की योजनाये क्रियांवन होने लगी हे ।
एकाएक लड़को का रुझान 'करामाती पेय' की दुकानों से सौंदर्य प्रसाधन की दुकानों की तरफ बड़ जाता हे।कोई कोई तो देशी 'नीबू नमक'-'मुल्तानी मिटटी' के उप्टन लगाकर घरवालो के लिए "भोंपा से पहले ही झोंटा" दिखने लगते हे ।
लड़कियो के फेसबुक अकाउंट एकाएक दिल्फ्टी शायरियों को त्याग 'महादेव भक्ति' की ओर उन्नत्ति से बढ़ने लगते हे।अब उन्हें बालो, चालो,फेसपेको,व्यूतिटिप्सो को सर्च करते हुए देखा जा सकता हे।हालांकि दिन रात मोबाइल बार्तालापो में रत रहकर सप्ताह में एक बार ही स्नान कर पाती हे।जो सारे गांव शहर में तितली बन स्वतन्त्र विचरण किया करती थी विवाह से पूर्व 'धुप से दुश्मनी' बना लेती की कही आगामी निखार की जगह "सुन्न भूरि" न हो जाए !
 
सहालग के समय में जहां घरवालो पर आर्थिक दबाब बनता हे बही हलवाइयों के क्लछो,डोंगो,पतीलो,चमचो की काया का पुनर्जन्म हो जाता हे।टेंट बालो का नास्ता कम भाव ज्यादा बड़ जाता हे और दूधियों के दूध में दूध कम पानी ज्यादा पाया जाता हे ।
 
एक से दशक पुरानी हुई भोजाई रूपी हबेलियो पर एकाएक पुन नई दुल्हन सा दिखने का संक्रमण दिखेगा जिसे एशियन पेंट से पुताई कर बन-ठन किया जाएगा किन्तु पेट की बड़ी हुई चर्वी और साढे तीन पसली से डेड पसली पर आये  फिगर को शायद ही कोई युक्ति पूर्ण कर पाये !
 
बड़े भाइयो बड़ी बुरी हालत होती हे इस सहालग में रूठे फ़ूफा से लेकर रूठी बीबियो की मनोती मुंनब्बल करते करते उन्हें पता ही नहीं चलता की कब दर्जी मास्टर ने पतलून का साइज छोटा सिल दिया या शेरवानी को मुशक महाराज सुभह के नाश्ते में रोशदान बना गए !
 
सहालग में असली आनन्द तो जो दूल्हा दुल्हन से छोटे होते हे उनका होता हे।दुल्हन की बहिनो के मन में दूल्हे को फूल फेंक कैसे मारा जाए जो दूल्हे के भाई की मुंडी से टकराये की जुगाड़ में समय निकलता हे तो दूल्हे के भाई काले सूट बाली को ताड़ूँगा या पिले बाली को ताड़ूँगा में बीत जाता हे।हालाँकि घुड़चढ़ी में करामाती पेय के साथ तालमेल बनाते हुए  ऐसे नागिन बनते हे की पहने हुए ब्लेजर का और नाली में भेद फोरेंसिक लेव भी न कर पाये हालाँकि नाचते हुए दूल्हे को धक्का दे खुद घोड़ी की  लगाम और रकाव थामने की तमन्ना थी ।
 
किसी किसी वारात् में फूफा के बाद कोई रुठने बाला व्यक्ति होता तो बह होते हे दूल्हे के बहिनोइ जिन्हें उनकी ससुराल बालो ने 'रसगुल्ला दिखाकर दहिबढ़ा' टिका दिया था हालाँकि बरात के खजांची भी यही होते हे और अपना दायित्व निभाते निभाते खुन्दक निकालते हे राइफल पर पूरा बिलडोरिया  फूँक खुद को प्राप्त रसगुल्ले और दहीबड़े का घाटा पूरा करने की कोशिश करते हुए देखे जाते हे ।
 
लड़कियो बालो की तरफ से कुछ लड़के ऐसे भी निस्वार्थ  सेवाभावी होते हे जो दौड़ दौड़ कर पानी से लेकर आसमानी पानी तक की व्यवस्था में लगे रहते हे। वास्तविकता में बो विवाह रूपी टूर्नामेंट के नॉकआउट से लेकर सेमीफाइनल तक प्रतियोगिता में रेफरी द्वारा मण्डप रूपी स्टेडियम से बाहर कर दिए गए होते हे।हालाँकि वारात् के स्वागत से लेकर दुल्हन बिदाई तक टकटकी बाँध दूल्हे की तरफ ऐसे देखते रहते की कह रहे हो "बेटा सेमीफाइनल तक हम भी खूब लोफ्टेट शॉट लगाये थे पर बाउंड्री बाल पर अंकल द्वारा कोट इन बोल्ड हो गए थे!,जाओ ले जाओ हमारी 'ख़ुशी' को ईश्वर करे तुम ससुरे दिन रात चोका-बर्तन करो,अब कुछ दिन बाद मामा बनने का इन्तेजार हम न करेंगे-अबकी सहालग में हम भी विवाह करेंगे!"
 
इन सबसे हटकर समधी (वरपक्ष)की विवाह तन्द्रा भंग जब होती जब अंग्रेजी यूनिफॉर्म में 'रट्टी बेंड' का बैज लगाये कोई देशी बन्दा कहता हे की "लो आपके बाजे बज गए अब हमारे पैसे दो..!"
 
तो मित्रो इस 'उठो देव बेठो देव 'से कान पकड़ उठा बैठक करने की सहालग रूपी सौगात पर बफर में ऐंठन भरी पूड़ियों जेसी शुभकामनाये .....
और नागिन डांस से तिगनी नाच तक की शुभकामनाओ युक्त सांत्वनाये ।
 
अंततः देवोत्थान पर पुरोहितो द्वारा पूजा में गाये गए कवित्त का भी उल्लेख कर दू 
 
उठो देव बैठो देव बाह्मनिया चट्काओ देव
क्वारन के विहाह करो,गौने करो,चाले करो !
काशी जाओ,प्रयाग जाओ,मथुरा-वृन्दावन जाओ,......चले जाओ बटेश्वर नाथ को ..!!