निष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकित
 

म प्र के सभी जिला सत्र नयायालय आगामी 23 नवंबर से पूर्व की तरह खुलेंगें , और 11 प्रकार के केसों की फिलहाल सुनवाई करेंगें , जिला अभिभाषक संघों द्वारा सभी एडवोकेटों से अपने नियमित कामकाज पर अदालतों में उपस्थित होने काआगृह किया है । 

म प्र उच्च न्ययायालय द्वारा जारी अपने आदेश में सभी जिला सत्र न्यायालयों को दिनांक 23 नवम्बर से 5 दिसम्बर तक खोले जाने और 11 प्रकार के केसों की नियमित सुनवाई का आदेश जारी किया है , यह सभी जिला सत्र न्यायालय 23 नवंबर से 5 दिसम्बर तक अल्टरनेट दिवस ( एक दिन छोड़कर- हर तीसरे दिन - एक अदालत एक दिन उसके बाद वही अदालत तीसरे दिन ) को प्रायोगिक ( एक्सपेरीमेंटल ) आधार पर खोलें जायेंगें ( अनुभव अच्छा रहा तो आदेश 5 दिसम्बर के बाद क्न्टीन्यू किया जायेगा ) 

जिन 11 प्रकार के केसों को नियमित रूप से सुना जायेगा उनमें - 

1. रिमांड , जमानत और सुपुर्दगीनामा संबंधी प्रकरण

2. क्रिमिनल तथा सिविल अपीलें और निगरानी याचिकायें 

3. जेल में बंद कैदियों से संबंधित सभी प्रकार के आवेदन तथा ट्रायल ( विचाराधीन बंदी) मैटर्स 

4.  05 साल से ज्यादा पुराने सभी क्रिमिनल मामले (क्रिमिनल केसेज) 

5. मोटर व्हीकल एक्ट (दुर्घटना क्लेम)  के तहत राशि ( अमाउंट ) के भुगतान किये जाने से संबंधित मामले जिनमें कि राशि जमा हो चुकी है 

 6. सी आर पी सी की धारा 125 तथा 128 से संबंधित मामले 

7. जुवैनाइल जस्टिस बोर्ड ( बाल अपराधी - किशोर न्याय संरक्षण अधिनियम ) से संबंधित मामले 

8. दत्तक ग्रहण ( गोदनामा ) से संबंधित मामले 

9. राजीनामा जिन मामलों में पेश किया जा चुका है वह सभी मामले 

10. सभी प्रकार के सिविल और क्रिमनल मामले जिनमें सुप्रीम कोर्ट और/ या हाई कोर्ट ने सुनवाई करने / निपटारा/ निराकरण के लिये समय सीमा निर्धारित की है या आदेश/ निर्देश दिया है  

11. अन्य सभी क्रिमनल और सिविल उच्च प्राथमिकता के मामले जिनमें न्यायालय को लगता है कि इस प्रकार के किसी मामले की सुनवाई उच्च प्राथमिकता और अत्यावश्यक मामले के रूप में की जाये 

सभी जिला सत्र न्यायालयों में कितने केसेज अदालतों द्वारा सुने जायें यह जिला सत्र न्यायाधीश तय ( निर्घारित ) करेंगें 

1. यह भी कि जहां फिजिकल सुनवाई अदालतों द्वारा की जायेगी वहीं साथ ही , वीडियो कान्फ्रेंसिंग तथा अन्य सुविधाजनक प्रकार से एडवोकेटों/ याचीयों/फरियादियों/परिवादियों के लिये)  चल रही वर्चुअल ( इंटरनेट/ या अन्य प्रकार से) भी सतत रूप से जारी रहेगी 

2. आगामी आदेश तक , कोरोना के खतरे के मद्देनजर अदालतों में हाजिर होने वाले एडवोकेटों , परिवादियों/फरियादियों/याचीयों , गवाहों के फाइलों या आदेश पत्रिकाओं पर हस्ताक्षर नहीं कराये जायेंगें , और संबंधित न्यायालय द्वारा उनकी उपस्थिति कोर्ट की आर्डरशीट पर अभिलेखित की जायेगी और कोर्ट फाइल में रखी जायेगी । 

3. सभी जिला सत्र न्यायाधीश तथा अन्य आउट लेयिंग स्टेशन्स ( जिला सत्र न्यायालय के अलावा अन्य न्यायालय - तहसील स्तर आदि पर स्थित न्यायालय ) यह सुनिश्चित करेंगें और निर्धारित करेंगें कि , न्यायायिक अधिकारीयों ( जूडिशिल आफिसर्स ) , एडवोकेटस / लायर्स, न्यायालय का स्टाफ , लिटिगेन्टस आदि के न्यायालय परिसर तथा कोर्ट रूम में प्रवेश तथा निर्गम ( अंदर आने और बाहर जाने तथा दोनों के दरम्यान ) किसी भी प्रकार की भीड़ न हो और सोशल डिस्टेंसिंग कायम रहे तथा सभी प्रकार के सावधानी और सुरक्षा संबंधी समस्त उपाय तय करेंगें । और कोर्ट परिसर में तथा कोर्ट रूम में सीमित लोग रहें तथा किसी भी दशा में भीड़ भाड़ न हो ।