डायरी आलेख/समाचार

निष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकित
अखिल भारतीय माथुर वैश्य महासभा के 133 वें स्थापना दिवस, महासभा जयंती पर पूरे विश्व में निवास कर रहे हैं माथुर वैश्य बंधुओं को बहुत-बहुत शुभकामनाएं ।    डा' अमरनाथ कौशल मिलजुल कर 133वीं महासभा जयंती मनायें। संगठन की शक्ति को समझें और समझायें। समाज उत्थान में हो सबकी भागीदारी । अभी चुनौतियां बहुत हैं करें और तैयारी । ईंट-ईंट से जुड़कर ही विशाल महल बन पाता है। संकल्पों की पुण्यवेदी पर काम पूर्ण हो जाता है। युवा शक्ति में ऊर्जा, साहस मिलकर उसे बढ़ाएं । उन के लिए मार्ग खोलें, पथ प्रर्दशक बन जायें। आज सक्रिय हर क्षेत्र में स्व समाज की नारी । उसको भी सम्मान मिले नहीं वह अब लाचारी । मिली सफलताओं पर ना हो हम अभिमानी । भूलें ना पूर्वजों को ,बने उनके गुण गानी । समाज के हर वर्ग तक, बात अपनी पहुंचाएं । जो रह गए पीछे उनको उन्नति शिखर चढ़ाएं । समाज उत्थान में हो सबकी भागीदारी । अभी चुनौतियां बहुत है करें और तैयारी । रचनाकाार:- अखिल भारतीय माथुर वैश्य महासभा के  कार्यसमिति के  नया भोपाल से सदस्य हैं! 
निष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकित
एक बार एक व्यक्ति की उसके बचपन के टीचर से मुलाकात होती है । वह उनके चरण स्पर्श कर अपना परिचय देता है।वे बड़े प्यार से पुछती है, 'अरे वाह, आप मेरे विद्यार्थी रहे है, अभी क्या करते हो, क्या बन गए हो ?' ' मैं भी एक टीचर बन गया हूं ' वह व्यक्ति बोला,' और इसकी प्रेरणा मुझे आपसे ही मिली थी जब में 7 वर्ष का था।' उस टीचर को बड़ा आश्चर्य हुआ, और वे बोली कि,' मुझे तो आपकी शक्ल भी याद नही आ रही है, उस उम्र में मुझसे कैसी प्रेरणा मिली थी ??' वो व्यक्ति कहने लगा कि .... 'यदि आपको याद हो, जब में चौथी क्लास में पढ़ता था, तब एक दिन सुबह सुबह मेरे सहपाठी ने उस दिन उसकी महंगी घड़ी चोरी होने की आपसे शिकायत की थी। आपने क्लास का दरवाज़ा बन्द करवाया और सभी बच्चो को क्लास में पीछे एक साथ लाइन में खड़ा होने को कहा था। फिर आपने सभी बच्चों की जेबें टटोली थी। मेरे जेब से आपको घड़ी मिल गई थी जो मैंने चुराई थी। पर चूंकि आपने सभी बच्चों को अपनी आंखें बंद रखने को कहा था तो किसी को पता नहीं चला कि घड़ी मैंने चुराई थी।टीचर उस दिन आपने मुझे लज्जा व शर्म से बचा लिया था। और इस घटना के बाद कभी भी आपने अपने व्यवहार से मुझे यह नही लगने दिया कि मैंने एक गलत कार्य किया था। आपने बगैर कुछ कहे मुझे क्षमा भी कर दिया और दूसरे बच्चे मुझे चोर कहते इससे भी बचा लिया था।' ये सुनकर टीचर बोली, ' मुझे भी नही पता था बेटा कि वो घड़ी किसने चुराई थी।' वो व्यक्ति बोला,'नहीं टीचर, ये कैसे संभव है ? आपने स्वयं अपने हाथों से चोरी की गई घड़ी मेरे जेब से निकाली थी।' टीचर बोली.....'बेटा मैं जब सबके पॉकेट चेक कर रही थी, उस समय मैने कहा था कि सब अपनी आंखे बंद रखेंगे , और वही मैंने भी किया, मैंने स्वयं भी अपनी आंखें बंद रखी थी।' अनुकरणीय आदर्श शिक्षक की प्रेरणादायक सोच । किसी को उसकी ऐसी शर्मनाक परिस्थिति से बचाने का इससे अच्छा उदाहरण और क्या हो सकता है ? अध्यापक की इस प्रेरणा से पढ़कर अध्यापक बना वह बच्चा आधा संस्कार लेकर यदि जीवन मे इतना बदलाव कर सकता है तो विचार कीजिये कि अनुकरणीय संदेश ( आप स्वयं भी अपनी आंख बंद कर ले जिससे तुलनात्मक/आलोचनात्मक सोच आपमें भी न आये ) का अनुकरण कर के जीवन मे कितना सृजनात्मक बदलाव किया जा सकता था। आइये प्रण करें की यदि हमें किसी की कमजोरी मालूम भी पड़ जाए तो उसका दोहन करना तो दूर, उस व्यक्ति को ये आभास भी ना होने देना चाहिये कि आपको इसकीं जानकारी भी है। स्वयं में व समाज में बदलाव लाने के प्रयास जारी रखें ।😢 आपका दिमाग एक शक्तिशाली चीज है। जब आप इसे सकारात्मक अच्छे विचारों से भर देंगे, तो आपका जीवन बदलना शुरू हो जाएगा।एक पहल बुराइयों को मिटाने की . ( साभार'- प्रेरणादायक कहांनिया )
निष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकित
श्रीमंत से 10 नम्बरी बने ज्योतिरादित्य सिंधिया श्रीगोपाल गुप्ता दो दिन पूर्व एक उप चुनावी सभा को कांग्रेस तज कर जनता की भलाई के उद्देश्य को लेकर भारतीय जनता पार्टी की शरण में आये राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संबोधित करते हुये बहुत ही मजेदार बयान दिया! कांग्रेस की दुखती हुई नस पर अंगूली जमाते हुये उन्होने भाजपा की पुरानी मांग को दोहराते हुये पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह को ललकारते हुये कहा कि बड़े भाई जो उप चुनाव में पर्दे के पीछे छुप गए हैं, वे सामने आऐं और कांग्रेस के लिए वोट मांगे! सिंधिया और भाजपा दोनों ही बहुत अच्छी तरह से जानते हैं कि सन् 2018 के चुनाव में या इसके पूर्व के भी कई चुनाव में और अब भी कांग्रेस के पास दिग्गी राजा के चुनाव प्रचार न करने कोई जबाव नहीं हैं,हालांकि स्वयं दिग्विजय सिंह कह चुके हैं कि उनके प्रचार करने से कांग्रेस के वोट कट जाते हैं! फिर भी भाजपा दिग्विजय सिंह को चुनाव उतर कर प्रचार करने की चुनौती देती रहती है लिहाजा अब सिंधिया ने भी यही घिस-पिट गए बयान को दोहरा दिया! मगर कांग्रेस हमैशा तरह सिंधिया के बयान पर चुप्पी साध गई! मगर इस बयान के 48 घण्टे के अन्दर भाजपा ने कांग्रेस को सिंधिया को लेकर एक मुद्दा पकड़ा दिया! बस फिर क्या था पूर्व मंत्री जीतू पटवारी से लेकर प्रदेश कांग्रेस के विभिन्न नेता सक्रिय हो गये और भाजपा व सिंधिया को घेरने लगे हैं! दरअसल भाजपा ने मध्य प्रदेश में हो रहे 28 विधानसभा उप चुनाव को लेकर जो अपने चालीस स्टार प्रचारकों की सूची बनाई है उसमें कांग्रेस में रहते श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया को 10 नम्बर जगह दी गई है,जो उनके कद और लोकप्रियता को देखते हुए वाकई हैरान कर देने और उनके समर्थकों के लिए एक झटका ही है! इसको लेकर कांग्रेस मुखर है और वो सिंधिया पर व्यंग्य बाणों की बौछार करने में पीछे नहीं रहना चाहती! यद्यपि यदि सूत्रों पर भरोषा किया जाये तो भारतीय जनता पार्टी ने उप चुनाव को लेकर अभी तक जितने भी सर्वे कराये हैं उसमें सिंधिया जी कोई विशेष कारनामा करने की स्थिति में नहीं हैं! यदि अन्य क्षेत्रों को छोड़ दिया जाए तो सिंधिया खुद कथित अपने गढ़ ग्वालियर-चंबल संभाग की 16 सीटों पर भी भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में ज्यादा सफल होते दिखाई नहीं दे रहे हैं! इसका मूल्याकंन करके ही अब चंबल-ग्वालियर की 16 सीटों को अकेले सिंधिया के भरोषे न छोड़कर खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने मोर्चा संभाल लिया है और पूरी ताकत झोंक दी है! दरअसल सिंधिया व उनके कांग्रेसी विधायकों की पार्टी में मौजुदगी को भाजपा के ही वफादार और पुराने कार्यकर्ता व समर्थक पचा नहीं पा रहे हैं! यदि चाय,पान और हजामत वालों की दुकानों पर चर्चा चल रही है चर्चाओं पर ध्यान दिया जाये तो उससे भी सिंधिया समर्थक व भाजपा का अपना कैडर बेस कार्यकर्ता काफी निराश और व्यथीत है! कभी कांग्रेस में रहते हुए आम जनता की नजर में पोस्टर वाॅय और ग्लैमरस के तौर पर धाकड़ नेता की हैसियत रखने वाले सिंधिया की छबि को भिण्ड में मेहगांव से कांग्रेस प्रत्याशी कटारे के लम्बे व विशाल नामाकंन जुलूस के कारण ढाई घण्टे सड़क पर जाम में फंस जाने की खबर से बड़ा धक्का लगा है! फिलहाल ये देखना काफी दिलचस्प होगा कि कांग्रेस में रहते श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया से भाजपा के 10 नम्बरी बने सिंधिया उप चुनाव में अपने कितने पूर्व विधायकों को विधायक बनाने में सफल होते हैं?ये भी उनके 10 नम्बर की तरह 10 नवंबर को ही तय होगा! !      
निष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकित
संस्थाओं / स्कूलों /स्वयं सेवी संस्थाओं / कपनीयों/ समितियों पंजीकृत किसी भी समिति के विरूद्ध अपराध पंजीकृत करने, विवेचना और मुकदमा चलाने की प्रक्रिया धारा 305 ( Cr.P.C. 1860 तथा 1973 ) (2010) लेखक- नरेन्द्र सिंह तोमर एडवोकेट , म प्र जब किसी भी पंजीकृत संस्था चाहे वह कोई कंपनी हो या समिति हो या निकाय हो या एन जी ओ हो या कोई चैरिटेबल ट्रस्ट हो या कोई स्कूल या कालेज हो या अन्य , अगर उनके खिलाफ कोई अपराध पंजीबद्ध किया जाता है , यानि उस पंजीकृत संस्था के विरूद्ध तो उसके किसी भी पदाधिकारी या अन्य को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता , यह प्रोटेक्शन सी आर पी सी की धारा 305 में पंजीकृत सभी संस्थाओं और निकायों को दिया गया है और न उन व्यक्तियों / पदाधिकारीयों के नाम से मुकदमा चलाया जा सकता है । इस धारा के प्रोटेक्शन के लिये संस्थाओं को एक बेहतरीन एडवोकेट से संपर्क करना चाहिये , वे ही इस धारा का मुकम्मल संरक्षण संस्थाओं को और उनके पदाधिकारीयों को दिला सकेंगें । सी आर पी सी की धारा में संस्था का सक्षम प्राधिकारी , पुलिस द्वारा अपराध दर्ज करने से पूर्व की जाने वाली जांच में पुलिस को एक पत्र नियुक्ति संबंधी सौंपेगा , जिसमें वह संस्था के वैध प्रतिनिधि (संस्था का लीगल एडवायजर या कोई एडवोकेट ) का नाम लिखते हुये उसे संबंधित प्रकरण मे अपना प्रतिनिधि संस्था की ओर से नियुक्त करने संबंधी पत्र पुलिस को देगा और अदालत में व पुलिस में संस्था की ओर से प्रतिनिधित्व करने का उल्लेख करेगा । ऐसी नियुक्ति घोषणा पर केवल हस्ताक्षर ही पर्याप्त होंगे , इस पर संस्था की कामन सील अनिवार्य नहीं होगी और जरूरी नहीं होगी । उल्लेखनीय है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत पंजीकृत संस्थाओं को राज्य का दर्जा प्राप्त है , जिसके अपने खुद के मेमोरेंडम व आर्टीकल आफ एसोसियेशन होते हैं जिन्हें ज्ञापन विधान कहा जाता है , उसका अपना खुद का संविधान और आंतरिक नियम व पारिनियम होते हैं, वह आंतरिक परिपत्र जारी करने हेतु प्राधिकृत होते हैं , इसलिये जिस तरह किसी राज्य या स्टेट के विरूद्ध कार्यवाही की जाती है और मुकदमे चलाये जाते है, वही प्रक्रिया पंजीकृत संस्थाओं के मामले मे अपनाई जाती है । सुप्रीम कोर्ट ने अनेक मामलों में अनच्छेद 12 की व्याख्या की है , और पंजीकृत संस्थाओं को राज्य का दर्जा प्राप्त उल्लेख किया है और पुलिस को ऐसी कोई कार्यवाही करने से रोक दिया है जो अनुच्छेद 12 के या धारा 305 के प्रावधानों से परे या विरूद्ध है या अतिक्रामित करती है विसंगत है , सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी सभी पुलिस कार्यवाहीयों को निरस्त कर दिया और पुलिस को दंडित किया जिनमें अनुच्छेद 12 और धारा 305 का पालन किये बगैर संस्थाओं के विरूद्ध पुलिस द्वारा कार्यवाही की गयी, ऐसी सभी कार्यवाहीयां गैर कानूनी और प्रताड़ित की जाने वाली कार्यवाहीयां मानीं गयीं । केवल वह संस्था ही अपने किसी पदाधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ अपराध दर्ज करा सकती है , अन्य कोई भी व्यक्ति या पुलिस सीधे किसी पदाधिकारी या कर्मचारी के विरूद्ध मामला दर्ज और अपराध पंजिबद्ध कर गिरफ्तार नहीं कर सकती । धारा 305 के प्रोटेक्शन में यह भी है कि यदि संस्था के नाम से केस दर्ज किया है तो केवल संस्था के नेम टायटल तक रहना होगा , किसी भी दोषी व्यक्ति को केवल संस्था अपनी आंतरिक जांच के आधार पर ही पुलिस या अदालत को सौंप सकती है । पुलिस संस्था के अभिलेख न तो जप्त कर सकती है और न देख सकती है , संस्था जितने अधिकार देना चाहेगी केवल उतनी जानकारी ही पुलिस संस्था से ले सकती है । संस्था जो और जितना आवश्यक समझेगी , केवल उतनी जानकारी और प्रमाणित प्रतियां जांच एजेंसी या विवेचना कर रहे पुलिस अधिकारी को देगी , वह बाध्य कर कुछ भी प्राप्त नहीं करेगी । अन्यथा यह , सी आर पी सी की धारा 305 , संविधान के अनुच्छेद 12 और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये आदेशों के विरूद्ध और अवमानना कारक होगा । नरेन्द्र सिह तोमर "आनंद" एडवोकेट
निष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकित
निष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकित
चेक पोस्ट कि साइट ठीक काम कर रही है या नहीं , पोस्ट और कमेंट हो रहे हैं कि नहीं । यदि यह पोस्ट सही तरीके से प्रकाशित होती है तो इसका अर्थ है कि आप झूठ बोल रहे हैं और वेबसाइट सही तरीके से काम कर रही है   
निष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकित
  👉 _*त्याग का रहस्य।*_ 👈 एक बार महर्षि नारद ज्ञान का प्रचार करते हुए किसी सघन बन में जा पहुँचे। वहाँ उन्होंने एक बहुत बड़ा घनी छाया वाला सेमर का वृक्ष देखा और उसकी छाया में विश्राम करने के लिए ठहर गये। नारदजी को उसकी शीतल छाया में आराम करके बड़ा आनन्द हुआ, वे उसके वैभव की भूरि भूरि प्रशंसा करने लगे। उन्होंने उससे पूछा कि.. “वृक्ष राज तुम्हारा इतना बड़ा वैभव किस प्रकार सुस्थिर रहता है? पवन तुम्हें गिराती क्यों नहीं?” https://chat.whatsapp.com/Kx5M5YA3NSxIAA8fBDvVYfसेमर के वृक्ष ने हंसते हुए ऋषि के प्रश्न का उत्तर दिया कि- “भगवान्! बेचारे पवन की कोई सामर्थ्य नहीं कि वह मेरा बाल भी बाँका कर सके। वह मुझे किसी प्रकार गिरा नहीं सकता।” नारदजी को लगा कि सेमर का वृक्ष अभिमान के नशे में ऐसे वचन बोल रहा है। उन्हें यह उचित प्रतीत न हुआ और झुँझलाते हुए सुरलोक को चले गये। सुरपुर में जाकर नारदजी ने पवन से कहा.. ‘अमुक वृक्ष अभिमान पूर्वक दर्प वचन बोलता हुआ आपकी निन्दा करता है, सो उसका अभिमान दूर करना चाहिए।‘ पवन को अपनी निन्दा करने वाले पर बहुत क्रोध आया और वह उस वृक्ष को उखाड़ फेंकने के लिए बड़े प्रबल प्रवाह के साथ आँधी तूफान की तरह चल दिया। सेमर का वृक्ष बड़ा तपस्वी परोपकारी और ज्ञानी था, उसे भावी संकट की पूर्व सूचना मिल गई। वृक्ष ने अपने बचने का उपाय तुरन्त ही कर लिया। उसने अपने सारे पत्ते झाड़ा डाले और ठूंठ की तरह खड़ा हो गया। पवन आया उसने बहुत प्रयत्न किया पर ढूँठ का कुछ भी बिगाड़ न सका। अन्ततः उसे निराश होकर लौट जाना पड़ा। कुछ दिन पश्चात् नारदजी उस वृक्ष का परिणाम देखने के लिए उसी बन में फिर पहुँचे, पर वहाँ उन्होंने देखा कि वृक्ष ज्यों का त्यों हरा भरा खड़ा है। नारदजी को इस पर बड़ा आश्चर्य हुआ। उन्होंने सेमर से पूछा- “पवन ने सारी शक्ति के साथ तुम्हें उखाड़ने की चेष्टा की थी पर तुम तो अभी तक ज्यों के त्यों खड़े हुए हो, इसका क्या रहस्य है?” वृक्ष ने नारदजी को प्रणाम किया और नम्रता पूर्वक निवेदन किया- “ऋषिराज! मेरे पास इतना वैभव है पर मैं इसके मोह में बँधा हुआ नहीं हूँ। संसार की सेवा के लिए इतने पत्तों को धारण किये हुए हूँ, परन्तु जब जरूरत समझता हूँ इस सारे वैभव को बिना किसी हिचकिचाहट के त्याग देता हूँ और ठूँठ बन जाता हूँ। मुझे वैभव का गर्व नहीं था वरन् अपने ठूँठ होने का अभिमान था इसीलिए मैंने पवन की अपेक्षा अपनी सामर्थ्य को अधिक बताया था। आप देख रहे हैं कि उसी निर्लिप्त कर्मयोग के कारण मैं पवन की प्रचंड टक्कर सहता हुआ भी यथा पूर्व खड़ा हुआ हूँ।“ नारदजी समझ गये कि संसार में वैभव रखना, धनवान होना कोई बुरी बात नहीं है। इससे तो बहुत से शुभ कार्य हो सकते हैं। बुराई तो धन के अभिमान में डूब जाने और उससे मोह करने में है। यदि कोई व्यक्ति धनी होते हुए भी मन से पवित्र रहे तो वह एक प्रकार का साधु ही है। ऐसे जल में कमल की तरह निर्लिप्त रहने वाले कर्मयोगी साधु के लिए घर ही तपोभूमि है। साभार :प्रेरक कहानियां
निष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकितनिष्क्रिय तारांकित
भोपाल । नये मंडी एक्ट से आई विसंगति को कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री कमल पटेल ने व्यापारियों से चर्चा के बाद दूर कर लिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सहमति के बाद अब मध्य प्रदेश की मंडियों में मंडी टेक्स 1 रुपये 50 पैसे के स्थान पर केवल 50 पैसे वसूला जाएगा, इसके साथ ही निराश्रित सहायता के 20 पैसे वसूलना भी बंद कर दिया गया है। राज्य सरकार के इस फैसले के बाद पिछले 12 दिन से हड़ताल कर रहे व्यापारी मंडी लौट आए हैं। कृषि मंत्री कमल पटेल ने इस फैसले को अपने जन्मदिन का तोहफा बताते हुए कहा कि नये मंडी एक्ट से अब किसानों को कहीं भी अपनी फसल बेचने की छूट है, अनाज के भंडारण के लिए लायसेंस की बाध्यता भी खत्म हो गई है। कमल पटेल ने बताया कि मंडी के बाहर कारोबार पर कोई मंडी टेक्स नहीं था लेकिन मंडी में 1 रुपये 50 पैसे मंडी टेक्स देने के साथ ही 20 पैसे निराश्रित सहायता शुल्क देना पड़ता था, व्यापारी मंडी टेक्स घटाने की मांग को लेकर पिछले 12 दिन से हड़ताल पर थे। सकल अनाज दलहन तिलहन व्यापार समिति के अध्यक्ष गोपालदास अग्रवाल ने कहा कि सरकार के इस फैसले से व्यापारियों को राहत मिलने के साथ मंडियों को बचाने का रास्ता भी खुला है। श्री अग्रवाल ने कहा कि किसानों का मंडियों पर भरोसा है, किसानों के कल्याण के लिए मंडियों का अस्तित्व बचा रहे इसके लिए वह मंडी शुल्क जारी रखना चाहते हैं, लेकिन खुले बाजार की प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए वह इसमें कमी चाहते थे उनकी मांग आज कृषि मंत्री कमल पटेल से चर्चा और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सहमति के बाद पूरी हो गई है, इससे मंडियों में व्यापार फिर शुरू हो गया है। श्री अग्रवाल ने कहा कि सरकार के फैसले के बाद राजस्व आय की छह माह बाद समीक्षा होगी इसके बाद मंडियों को बचाए रखने के लिए नये सिरे से निर्णय लिया जाएगा।

उपश्रेणियाँ